Social Media Addiction : इंटरनेट और सोशल मीडिया ने लोगों को पहले से कहीं अधिक जोड़ने का दावा किया है, लेकिन इसके साथ ही अकेलेपन की समस्या भी तेजी से बढ़ी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य चुनौती मान रहे हैं। उनका कहना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने के बावजूद कई लोग पहले की तुलना में खुद को अधिक अकेला महसूस कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई लेखक पॉल डेली का मानना है कि बड़ी टेक कंपनियां ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करती हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को अधिक समय तक स्क्रीन से जोड़े रखना होता है।
उनके अनुसार, यूजर्स यह जानते हुए भी कि सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है, उससे दूरी नहीं बना पाते। हालांकि यह लेखक और कुछ विशेषज्ञों का दृष्टिकोण है, जिस पर अलग-अलग मत भी मौजूद हैं।
Social Media Addiction
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसे एल्गोरिदम का इस्तेमाल करते हैं जो यूजर्स को लगातार नया कंटेंट, नोटिफिकेशन, लाइक्स और सुझाव दिखाते रहते हैं। इससे लोग बार-बार अपना फोन चेक करते हैं और प्लेटफॉर्म पर अधिक समय बिताते हैं। यही वजह है कि कई लोगों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल आदत से आगे बढ़कर निर्भरता का रूप ले सकता है।
हर दिन घंटों बीत रहा समय
रिपोर्टों के अनुसार, एक औसत व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 2 घंटे 23 मिनट सोशल मीडिया पर बिताता है। लंबे समय में यह अवधि जीवन के कई वर्षों के बराबर हो सकती है। सबसे अधिक असर 25 वर्ष से कम उम्र के युवाओं पर देखा जा रहा है, जिनमें लगातार ऑनलाइन रहने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों में तीन घंटे से अधिक सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर डिप्रेशन और एंग्जाइटी का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, कई युवा फोमो (Fear of Missing Out) यानी किसी महत्वपूर्ण चीज से पीछे छूट जाने के डर के कारण देर रात तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। इसका असर उनकी नींद, पढ़ाई, कामकाज और सामाजिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है।
डोपामाइन की भूमिका क्या है?
न्यूरोसाइंस के अनुसार, जब किसी पोस्ट पर लाइक, कमेंट या नोटिफिकेशन मिलता है तो दिमाग में डोपामाइन नामक रसायन सक्रिय होता है, जो खुशी और इनाम का एहसास कराता है। यही प्रक्रिया लोगों को बार-बार फोन देखने के लिए प्रेरित कर सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सोशल मीडिया का संतुलित और जिम्मेदारी से किया गया उपयोग फायदेमंद हो सकता है। इसलिए स्क्रीन टाइम सीमित रखना, ऑफलाइन गतिविधियों में हिस्सा लेना और परिवार व दोस्तों के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।




