National Girlfriend Day 2026 : स्कूल की घंटी कॉलेज की कैंटीन मोहल्ले की गलियां और घंटों चलने वाली बातें। यही बचपन की दोस्ती की सबसे खूबसूरत पहचान होती है। शादी के बाद जीवन की रफ्तार भले ही बदल जाती है लेकिन सहेलियों से जुड़े यह पल उम्रभर यादों में महकते रहते हैं। राष्ट्रीय गर्लफ्रेंड दिवस के मौके पर महिलाओं ने बताया कि आज भी पुरानी सहेलियों से मिलते ही मानो वक्त थम सा जाता है।
हर वर्ष एक अगस्त को यह खास दिन मनाया जाता है। यह दिन किसी प्रेमी-प्रेमिका से जुड़ा नहीं बल्कि महिलाओं की अपनी पक्की सहेलियों को समर्पित होता है। इस मौके पर महिलाएं अपनी सहेलियों के साथ मिलकर जश्न मनाती हैं।
National Girlfriend Day 2026
आसान शब्दों में कहा जाए तो यह शक्ति और समर्थन का दिन है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि प्राचीन ग्रीस में महिलाओं की दोस्ती धार्मिक और सामाजिक जीवन में बड़ी भूमिका निभाती थी। उस दौर में महिलाएं डेमेटर और पर्सेफोन को सम्मानित करने वाले उत्सव थेस्मोफोरिया में हिस्सा लेती थीं जिसने उन्हें पुरुष-प्रधान स्थानों से दूर एक-दूसरे से जुड़ने का मौका दिया था। समय बीतने के साथ स्कूल-कॉलेज के दिनों में हर खुशी हर राज और हर शरारत की साथी रहने वाली सहेलियां शादी के बाद धीरे-धीरे फोन और वीडियो कॉल तक ही सिमट कर रह गई हैं। व्हाट्सएप और सोशल मीडिया ने बातचीत को आसान जरूर बना दिया है लेकिन साथ बैठकर घंटों गप्पें मारने और बेवजह हंसने की जो खुशी है वह आज भी किसी तकनीक से पूरी नहीं हो पाती।
शादी-ब्याह पर होती है मुलाकात
हाथरस की महिलाओं का कहना है कि रक्षाबंधन भाईदूज या मायके में होने वाली किसी शादी-ब्याह के दौरान ही वर्षों बाद सहेलियों से मुलाकात हो पाती है। ऐसे मौकों पर लगता है जैसे वक्त ठहर गया हो और बचपन एक बार फिर लौट आया हो। जीवन में नए रिश्ते और नए दोस्त जरूर बनते हैं लेकिन बचपन की सहेलियों जैसा अपनापन और निस्वार्थ साथ कभी नहीं भुलाया जा सकता। हाथरस निवासी पूजा वार्ष्णेय ने बताया कि शादी के बाद जिम्मेदारियों में वक्त कहां निकल गया पता ही नहीं चला। अब राखी या भाईदूज पर जब मायके जाती हूं तभी पुरानी सहेलियों से मुलाकात हो पाती है। उनसे मिलकर ऐसा लगता है जैसे बचपन एक बार फिर लौट आया हो।
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