H-1B Visa Rules 2026 : अमेरिका में नौकरी की तैयारी कर रहे विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा एक बार फिर चर्चा में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को H-1B प्रोग्राम की निगरानी बढ़ाने वाले नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही कुछ H-1B आवेदनों पर लागू 1 लाख डॉलर के भुगतान की शर्त को अगले 12 महीने तक बढ़ाने वाली घोषणा भी की गई है। नई व्यवस्था में उन कंपनियों पर खास नजर रहेगी, जिन्होंने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या ऐसा करने की योजना बना रही हैं।
नए आदेश के तहत विदेश, श्रम और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को H-1B आवेदन की जांच करते समय यह देखना होगा कि संबंधित कंपनी ने पिछले एक साल में समान काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है या भविष्य में छंटनी की योजना बनाई है।
H-1B Visa Rules 2026
इसके लिए वाणिज्य और शिक्षा विभाग समेत दूसरी एजेंसियों से वेतन, रोजगार और उद्योग से जुड़ी जानकारी भी ली जा सकेगी। व्हाइट हाउस का दावा है कि H-1B प्रोग्राम को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए बनाया गया था, लेकिन कुछ नियोक्ताओं, थर्ड-पार्टी प्लेसमेंट कंपनियों और आउटसोर्सिंग फर्मों ने इसका गलत इस्तेमाल किया। प्रशासन के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में H-1B कर्मचारियों और अमेरिका में जन्मे समान कर्मचारियों के वेतन में 9 हजार से 20 हजार डॉलर तक का अंतर देखा गया है। ये आंकड़े और निष्कर्ष ट्रंप प्रशासन के आदेश में दिए गए हैं।
शर्त एक साल और बढ़ी
ट्रंप ने अलग घोषणा के जरिए सितंबर 2025 में लागू किए गए 1 लाख डॉलर भुगतान के प्रावधान को भी एक साल के लिए आगे बढ़ाया है। यह शर्त अमेरिका से बाहर मौजूद कुछ नए H-1B कर्मचारियों की याचिकाओं पर लागू होती है। राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में छूट का प्रावधान भी रखा गया है। मौजूदा H-1B धारकों के नवीनीकरण और अमेरिका में स्टूडेंट वीजा से स्टेटस बदलने वाले कुछ आवेदकों को इससे बाहर रखा गया है।
फीस को लेकर अदालत में लड़ाई
1 लाख डॉलर की यह व्यवस्था कानूनी विवाद से भी घिरी हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक एक संघीय न्यायाधीश फीस बढ़ोतरी को अवैध ठहरा चुके हैं और इससे जुड़ा मामला अपील के स्तर पर विचाराधीन है। दूसरी तरफ अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स की चुनौती से जुड़ा मामला भी अदालत में है। ऐसे में फीस की व्यवस्था को लेकर कानूनी तस्वीर अभी पूरी तरह अंतिम नहीं हुई है। H-1B प्रोग्राम का इस्तेमाल अमेरिकी कंपनियां टेक्नोलॉजी सहित कई विशेष कौशल वाले क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए करती हैं।
नई व्यवस्था के बाद ऐसे नियोक्ताओं को अतिरिक्त जांच का सामना करना पड़ सकता है, खासकर तब जब कंपनी ने हाल में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की हो। श्रम विभाग को पुराने लेबर कंडीशन एप्लिकेशन के डेटा की समीक्षा शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
क्यों अहम है फैसला
भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स लंबे समय से H-1B प्रोग्राम के सबसे बड़े लाभार्थी समूहों में शामिल रहे हैं। इसलिए आवेदन प्रक्रिया महंगी होने या कंपनियों की जांच बढ़ने का असर भारतीय उम्मीदवारों की भर्ती रणनीति पर भी पड़ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सभी भारतीय H-1B धारकों को 1 लाख डॉलर चुकाने होंगे। नियम कुछ खास नई याचिकाओं पर केंद्रित है और भुगतान की जिम्मेदारी नियोक्ता की होती है। H-1B को लेकर ट्रंप प्रशासन का नया कदम केवल फीस तक सीमित नहीं है। सरकार का जोर अब कंपनी की छंटनी, वेतन और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति के कारणों की ज्यादा बारीकी से जांच करने पर है।
दूसरी ओर कारोबार समूहों का तर्क रहा है कि H-1B प्रोग्राम अमेरिकी कंपनियों की कौशल जरूरतों को पूरा करता है। कानूनी चुनौतियों के बीच फिलहाल आवेदकों और नियोक्ताओं के लिए नई याचिका दाखिल करने से पहले लागू नियम और अपवाद समझना जरूरी होगा।




