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PM मोदी की ‘सोना मत खरीदो’ अपील के पीछे क्या है बड़ा आर्थिक खतरा?

Modi Gold Import:

Modi Gold Import: प्रधानमंत्री मोदी  की हालिया अपील  “एक साल तक सोना न खरीदें, विदेश यात्रा टालें और जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम करें”  अब केवल सलाह नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी बड़ी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और आयात बिल पर पड़ रहा है।

डॉलर की कमाई से ज्यादा खर्च कर रहा भारत

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल करीब 691 बिलियन डॉलर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार 2026 में भारत का चालू खाता घाटा 84.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसका मतलब है कि देश जितना डॉलर कमा रहा है, उससे कहीं ज्यादा खर्च कर रहा है। सरकार की चिंता इसी बढ़ते दबाव को लेकर है।

Modi Gold Import: सोने का बढ़ता आयात बना बड़ा बोझ

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदने वाला देश है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने करीब 72 बिलियन डॉलर यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए का सोना आयात किया। सोने का पूरा भुगतान डॉलर में किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। यही वजह है कि सरकार लोगों से फिलहाल सोना खरीदने से बचने की अपील कर रही है।

Modi Gold Import: ईरान युद्ध से महंगा हुआ कच्चा तेल

अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% तेल विदेशों से खरीदता है। युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के दौरान लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना खरीदते हैं। इससे सोने की कीमत और आयात दोनों बढ़ जाते हैं, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला कारक बनता है।

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Will the middle class get relief from the first general budget of Modi 3.0?