Home » उत्तराखंड » UK की इस झील में बर्फ पिघलते ही दिखने लगती हैं इंसानी खोपड़ियां, 700 से ज्यादा कंकालों का रहस्य आज भी कायम

UK की इस झील में बर्फ पिघलते ही दिखने लगती हैं इंसानी खोपड़ियां, 700 से ज्यादा कंकालों का रहस्य आज भी कायम

UK Lake of Skeletons : उत्तराखंड की रहस्यमयी रूपकुंड झील अपनी खूबसूरती से ज्यादा बर्फ के नीचे दबे इंसानी अवशेषों के लिए जानी जाती है। करीब 16,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह झील गर्मियों में बर्फ पिघलने के साथ ऐसा दृश्य दिखाती है, जिसे देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। उत्तराखंड का रूपकुंड समुद्र तल से करीब 16,500 फीट की ऊंचाई पर हिमालयी क्षेत्र में स्थित है। साल के ज्यादातर समय यह झील बर्फ से ढकी रहती है। गर्मियों में जब बर्फ की परत पिघलने लगती है तो पानी के भीतर और आसपास इंसानी हड्डियां और खोपड़ियां नजर आने लगती हैं। इसी वजह से इसे आमतौर पर ‘कंकालों की झील’ कहा जाता है।

जब इस जगह पर इंसानी अवशेषों का पता चला तो शुरुआती दौर में आशंका जताई गई कि ये दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यहां पहुंचे जापानी सैनिकों के हो सकते हैं। बाद में जांच में यह संभावना खारिज हो गई। अवशेषों की उम्र काफी ज्यादा पुरानी पाई गई, जिससे साफ हुआ कि इनके पीछे सदियों पुरानी कोई घटना हो सकती है।

UK Lake of Skeletons

रूपकुंड से जुड़ी कई लोककथाएं भी प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार राजा और रानी अपने दल के साथ नंदा देवी के दर्शन के लिए निकले थे। यात्रा के दौरान अनुशासनहीनता से देवी नाराज हो गईं और उनके क्रोध से भयंकर आपदा आई, जिसमें पूरा दल मारा गया। हालांकि यह धार्मिक मान्यता है, इसका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। कंकालों को लेकर अलग-अलग समय पर हुए शोधों में सामने आया कि यहां मिले सभी अवशेष एक ही समूह के लोगों के नहीं हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के अवशेष मिलने के संकेत मिले हैं। इनमें पुरुषों और महिलाओं दोनों के कंकाल शामिल हैं। यही वजह है कि रूपकुंड का रहस्य और भी गहरा हो गया है।

बढ़ाई रहस्यमय कहानी

अब तक रूपकुंड के आसपास करीब 700 से 800 मानव अवशेष मिलने की बात सामने आती रही है। बर्फीले वातावरण के कारण कई अवशेष लंबे समय तक सुरक्षित रहे। झील की खोज 1942 में हुई थी और इसके बाद से यह जगह इतिहास, पुरातत्व और रहस्य में रुचि रखने वाले लोगों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। रूपकुंड तक पहुंचना आसान नहीं है। यहां जाने के लिए कठिन पहाड़ी ट्रैक से गुजरना पड़ता है। मौसम की स्थिति को देखते हुए मई के अंतिम सप्ताह से सितंबर-अक्टूबर के बीच ट्रेकिंग के लिए समय अपेक्षाकृत अनुकूल माना जाता है। हालांकि ऊंचाई और मौसम को देखते हुए बिना उचित तैयारी के यहां जाना जोखिम भरा हो सकता है।

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