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Hormuz जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप का NATO और यूरोप को संदेश, बोले- मदद नहीं की तो खतरे में गठबंधन का भविष्य

Hormuz : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump ने अपने सहयोगी देशों को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर मित्र देश Strait of Hormuz को सुरक्षित और खुला रखने में सहयोग नहीं करते हैं तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों पर पड़ सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में NATO के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि यूरोप और चीन को इस मुद्दे पर आगे आकर भूमिका निभानी चाहिए। उनके मुताबिक खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल पर सबसे ज्यादा निर्भरता इन्हीं क्षेत्रों की है।

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उन्होंने तर्क दिया कि अगर इन देशों की अर्थव्यवस्था इस मार्ग से गुजरने वाले तेल पर टिकी है तो उन्हें भी इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान देना चाहिए। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह इस महीने होने वाली अपनी संभावित मुलाकात को टाल सकते हैं। यह बैठक चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ प्रस्तावित थी। बताया जा रहा है कि अमेरिका इस समय चीन पर दबाव बना रहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के प्रयासों में सहयोग करे। ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका ने कई अंतरराष्ट्रीय संकटों में अपने सहयोगियों की मदद की है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूक्रेन संकट के दौरान अमेरिका ने बड़ी भूमिका निभाई, जबकि वह क्षेत्र अमेरिका से काफी दूर है। उनके मुताबिक अब यह देखना जरूरी है कि संकट के समय सहयोगी देश अमेरिका के साथ कितनी मजबूती से खड़े होते हैं।

सहयोग की उम्मीद

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में हालात को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। ट्रंप ने संकेत दिया कि वह यूरोपीय देशों से सैन्य स्तर पर सहयोग चाहते हैं। इसमें विशेष कमांडो इकाइयों या अन्य सुरक्षा संसाधनों की तैनाती शामिल हो सकती है। ट्रंप ने यह भी कहा कि खाड़ी क्षेत्र में हाल के दिनों में ड्रोन और समुद्री माइंस जैसे खतरे बढ़े हैं। उनका कहना था कि ऐसे जोखिमों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। उनके अनुसार इस काम के लिए कई देशों की संयुक्त भागीदारी जरूरी होगी।

अंत में ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका अपने सहयोगियों की मदद के लिए तैयार है, लेकिन इस बार उन्हें भी जिम्मेदारी निभानी होगी। उनका कहना था कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों को साथ आना होगा।

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