H-1B Visa : अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे भारतीय पेशेवरों के लिए वीजा नियमों को लेकर चिंता बढ़ सकती है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही है, जो पहले अपने अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालती हैं और बाद में विदेशी कामगारों की जरूरत बताकर H-1B वीजा के लिए आवेदन करती हैं। वेंस का कहना है कि इस वीजा व्यवस्था का उद्देश्य अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी लोगों को नियुक्त करना नहीं है। ट्रंप प्रशासन पहले ही इस कार्यक्रम की निगरानी बढ़ाने की दिशा में कदम उठा चुका है।
जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों के लिए वीजा मांगते समय योग्य कामगारों की कमी का हवाला देती हैं, जबकि उनके पुराने रिकॉर्ड देखने पर पता चलता है कि उन्होंने हजारों अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है।
H-1B Visa
वेंस ने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई कंपनी एक तरफ पांच हजार कर्मचारियों की छंटनी करती है और दूसरी तरफ नए विदेशी कर्मचारियों की जरूरत बताती है, तो ऐसी स्थिति की समीक्षा जरूरी है। उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह कम वेतन वाले विदेशी कामगारों को नियुक्त करने के लिए नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य विशेष कौशल वाले पेशेवरों के जरिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
Vice President Vance on the Trump Administration’s H1B visa reforms:
“The H-1B should not exist to replace American workers with low-wage foreigners. It should exist to enrich the American economy.” pic.twitter.com/7bunZ97u5Z
— Vice President JD Vance (@VP) September 27, 2026
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार वीजा व्यवस्था में संभावित दुरुपयोग रोकने के लिए प्रशासनिक बदलावों पर काम कर रही है। इसके लिए कांग्रेस की ओर से नया कानून बनाए जाने का इंतजार करने के बजाय मौजूदा अधिकारों के तहत कदम उठाने की बात कही गई है।
जारी कर चुका है आदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को H-1B वीजा कार्यक्रम से संबंधित एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत संघीय एजेंसियों को वीजा आवेदनों की जांच करते समय संबंधित कंपनी के कर्मचारियों की छंटनी का रिकॉर्ड भी देखने का निर्देश दिया गया है। नई व्यवस्था में यह जांच की जाएगी कि कंपनी ने पिछले एक साल में अमेरिकी कर्मचारियों को निकाला है या भविष्य में ऐसी कोई योजना बनाई है। विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान दिया जाएगा, जहां विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
भारतीय की बढ़ी चिंता
अमेरिका में H-1B वीजा हासिल करने वालों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही है। वित्त वर्ष 2025 में इस श्रेणी के तहत स्वीकृत वीजा लाभार्थियों में 70 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय थे। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में होने वाले बदलावों का असर भारतीय आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों और अन्य कुशल कर्मचारियों पर पड़ सकता है। अमेरिका में इस वीजा के तहत सालाना 65 हजार नियमित स्थान निर्धारित हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिकी संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले योग्य उम्मीदवारों के लिए 20 हजार स्थान उपलब्ध होते हैं।
नए निर्देशों के बाद अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के दौरान अपने भर्ती रिकॉर्ड और कर्मचारियों की छंटनी से जुड़ी जानकारी की अतिरिक्त जांच का सामना करना पड़ सकता है।
नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाना नहीं
हालांकि, नए आदेश का अर्थ सभी विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाना नहीं है। इसका मुख्य जोर उन नियोक्ताओं की पहचान करना है, जो अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने के बाद समान पदों पर विदेशी कामगारों की भर्ती करते हैं। बढ़ती निगरानी और वीजा संबंधी खर्च के कारण अमेरिका में रोजगार तलाश रहे भारतीय पेशेवरों के लिए आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
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