Prayagraj News : प्रयागराज के झूंसी क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी ने करीब 12 गांवों के लोगों की दिनचर्या बदल दी है। पिछले छह दिनों से इलाके में भय का माहौल है। शाम होते ही गलियां सूनी हो जाती हैं और लोग घरों के भीतर रहने को मजबूर हैं। बच्चों ने बाहर खेलना बंद कर दिया है, जबकि महिलाएं खेतों की ओर जाने से बच रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए के लगातार देखे जाने से पूरे क्षेत्र में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। तेंदुए की पहली पुष्टि 13 जून को हुई, जब हवेलिया वार्ड में एक मादा तेंदुआ अपने दो शावकों के साथ सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दी।
इसके बाद 16 जून को शास्त्री ब्रिज के नीचे स्थित एसटीपी प्लांट के पास फिर तेंदुए को देखा गया। वहां मौजूद एक कर्मचारी ने उसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया। इन घटनाओं के बाद आसपास के गांवों में दहशत और बढ़ गई है।
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सोनौटी, बदरा, मुंशी का पुरा और अन्य गांवों में लोग रात के समय समूह बनाकर पहरेदारी कर रहे हैं। हाथों में टॉर्च और लाठियां लेकर ग्रामीण गलियों और पशुशालाओं के आसपास निगरानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि खेतों में खड़ी चरी और घनी झाड़ियों में तेंदुए के छिपे होने की आशंका बनी रहती है, इसलिए अकेले निकलना जोखिम भरा माना जा रहा है। ग्रामीणों ने अपनी दिनचर्या में भी बदलाव कर लिया है। पशुओं को चारा देना, दूध निकालना और खेतों से लौटने जैसे काम अब अंधेरा होने से पहले ही पूरे किए जा रहे हैं। किसी जरूरी काम से बाहर निकलना पड़े तो लोग अकेले नहीं जाते। गांव के कई परिवारों ने बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर न निकलने की हिदायत दे रखी है।
बढ़ाए गए सुरक्षा इंतजाम
जंगल और खाली क्षेत्रों के पास रहने वाले परिवार अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। बदरा गांव के कुछ लोगों ने घरों के आसपास बांस और तार की अस्थायी बाड़ लगा दी है। ग्रामीणों का डर है कि तेंदुआ पेड़ों पर बैठकर या झाड़ियों में छिपकर अचानक हमला कर सकता है। खासतौर पर छोटे बच्चों और पालतू पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि खेतों में जाने के दौरान हमेशा खतरे का एहसास बना रहता है। कई परिवारों ने बच्चों को घर के बाहर अकेले खेलने से रोक दिया है। रात के समय किसी भी हलचल की आवाज लोगों की चिंता बढ़ा देती है। गांवों में लोग लगातार एक-दूसरे को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
वन विभाग पर टिकी निगाहें
तेंदुए की लगातार मिल रही लोकेशन के बाद ग्रामीण वन विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक वन विभाग तेंदुए और उसके शावकों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर नहीं ले जाता, तब तक इलाके में सामान्य स्थिति लौटना मुश्किल है। फिलहाल झूंसी के गांवों में डर, सतर्कता और पहरेदारी का दौर जारी है।
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