US News : अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे हजारों भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी श्रम विभाग ने H-1B वीजा धारकों के न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। अगर यह नियम लागू होता है तो विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने वाली कंपनियों को पहले से कहीं ज्यादा सैलरी देनी होगी। प्रस्ताव के मुताबिक कुछ श्रेणियों में वेतन करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका सीधा असर भारतीय इंजीनियरों, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और टेक कर्मचारियों पर पड़ने वाला है, क्योंकि H-1B वीजा पाने वालों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की ही होती है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम स्थानीय कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए उठाया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि कई कंपनियां कम लागत पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर रही हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरी और वेतन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
US में नौकरी का सपना होगा महंगा!
इसी वजह से अब न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ाकर कंपनियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे सस्ती विदेशी लेबर की बजाय घरेलू कर्मचारियों को प्राथमिकता दें। अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, H-1B वीजा के तहत तय किए गए मौजूदा वेतन मानक करीब दो दशक पुराने हैं। बदलती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई को देखते हुए इन्हें अब अप्रासंगिक माना जा रहा है। इसी वजह से ‘इम्प्रूविंग वेज प्रोटेक्शन’ नाम के प्रस्ताव के तहत वेतन ढांचे में बदलाव किया जा रहा है।
नए प्रस्ताव के मुताबिक एंट्री लेवल कर्मचारियों के लिए न्यूनतम सैलरी 73,279 डॉलर से बढ़ाकर 97,746 डॉलर करने की बात कही गई है। वहीं अनुभवी पेशेवरों की चौथी श्रेणी का वेतन 1,44,202 डॉलर से बढ़कर 1,75,464 डॉलर तक पहुंच सकता है। यह बदलाव केवल H-1B वीजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि H-1B1, E-3 और PERM जैसे दूसरे रोजगार आधारित वीजा प्रोग्रामों पर भी लागू हो सकता है।
छोटी कंपनियों के सामने बढ़ सकती है मुश्किल
इस प्रस्ताव के बाद अमेरिका के टेक और स्टार्टअप सेक्टर में बहस तेज हो गई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के बाद छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देना आसान नहीं रहेगा। खास तौर पर फ्रेशर्स और एंट्री लेवल इंजीनियरों के लिए अमेरिका में मौके कम हो सकते हैं। कंपनियां ज्यादा लागत से बचने के लिए भर्ती प्रक्रिया सीमित कर सकती हैं।
पहले भी हो चुकी है ऐसी कोशिश
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने H-1B नियमों को सख्त करने की कोशिश की हो। साल 2020 में भी ट्रंप प्रशासन ने अचानक वेतन नियम बदलने की पहल की थी, लेकिन कानूनी विवादों के कारण वह फैसला लागू नहीं हो पाया। इसके बाद सितंबर 2025 में विदेशी कर्मचारियों पर एक लाख डॉलर तक का अतिरिक्त शुल्क लगाने का आदेश भी चर्चा में रहा था। अब नए वेतन प्रस्ताव ने फिर से वैश्विक टेक इंडस्ट्री में हलचल बढ़ा दी है।
26 मई तक मांगी गई लोगों की राय
अमेरिकी सरकार ने इस प्रस्ताव पर फिलहाल अंतिम फैसला नहीं लिया है। श्रम विभाग ने 26 मई तक आम लोगों, कंपनियों और उद्योग संगठनों से सुझाव मांगे हैं। इसके बाद प्रतिक्रिया के आधार पर नियमों में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि अगर यह प्रस्ताव मौजूदा रूप में लागू हो गया, तो अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए राह पहले से कहीं ज्यादा कठिन और महंगी हो सकती है।





