CM Yogi : पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग के लिए सोमवार को प्रचार का आखिरी दिन रहा, जिसमें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ने पूरी ताकत झोंक दी। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रैलियों, रोड शो और जनसभाओं के जरिए मतदाताओं को साधने की कोशिश की गई। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी चुनावी मैदान में उतरकर विपक्ष पर जोरदार हमला बोला।
उन्होंने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि पहले चरण के मतदान के बाद ही रुझान साफ हो गए हैं और राज्य में “डबल इंजन” सरकार बनने की दिशा तय हो चुकी है। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
CM Yogi का टीएमसी पर तीखा हमला
अपने भाषण में योगी आदित्यनाथ ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नतीजे आने के बाद कथित तौर पर “गुंडागर्दी” खत्म हो जाएगी और जो लोग अब तक दबंगई कर रहे हैं, वे सड़कों से गायब हो जाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आम जनता की जमीनों पर कब्जा और लूट-पाट जैसी घटनाओं पर डबल इंजन सरकार लगाम लगाएगी। इस बयान को लेकर सियासी बहस और तेज हो गई है।
ममता बनर्जी पर राष्ट्रपति को लेकर आरोप
योगी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। योगी के अनुसार, यह रवैया आदिवासी समाज के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है। इस बयान ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में कुछ जगहों पर हल्की झड़पों की खबरें सामने आई थीं, लेकिन कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा। अब सभी की नजरें दूसरे और अंतिम चरण पर टिकी हैं। राजनीतिक दलों का दावा है कि पहले चरण के रुझान उनके पक्ष में हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह और विरोधियों में बेचैनी देखी जा रही है।
पश्चिम बंगाल की जनता ने संकल्प लिया है कि जिस TMC ने नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया, उनके रोजगार और अधिकारों पर डकैती डाली, ऐसी भ्रष्ट TMC सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकना है… pic.twitter.com/qbOv7OA9hV
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) April 27, 2026
भावनात्मक अपील बनाम विकास का मुद्दा
जहां बीजेपी “डबल इंजन सरकार” और विकास के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रही है, वहीं टीएमसी “बंगाल की बेटी” जैसे नारों के जरिए भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश कर रही है। दोनों पक्षों के बीच सीधा मुकाबला है और हर सीट पर कड़ी टक्कर की उम्मीद जताई जा रही है। अब चुनाव प्रचार थम चुका है और 29 अप्रैल को मतदाता अपना फैसला सुनाएंगे।
सभी की निगाहें 4 मई पर टिकी हैं, जब नतीजे घोषित होंगे और यह साफ हो जाएगा कि पश्चिम बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। फिलहाल, बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनावी माहौल पूरी तरह चरम पर है।
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