Chhattisgarh Politics : छत्तीसगढ़ की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार लड़ाई बयानों से आगे निकलकर आमने-सामने की बहस तक पहुंच गई। मुद्दा भी ऐसा था, जिसका सीधा रिश्ता प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों के पक्के घर से है। प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर लंबे समय से एक-दूसरे की सरकार पर सवाल उठा रहे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मौजूदा उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा रायपुर प्रेस क्लब में एक ही टेबल पर बैठ गए। इसके बाद करीब 80 मिनट तक आंकड़ों की ऐसी जंग चली, जिसमें कभी कांग्रेस सरकार के पांच साल का हिसाब मांगा गया तो कभी केंद्र और मौजूदा बीजेपी सरकार के दावों पर सवाल उठे।
विजय शर्मा ने साय सरकार की रफ्तार को सामने रखा तो बघेल ने पुराने आवास, पोर्टल और केंद्र से मिलने वाली राशि का मुद्दा उठाकर पलटवार किया। दोनों नेताओं के समर्थक भी प्रेस क्लब के बाहर आमने-सामने आ गए।
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बहस में विजय शर्मा ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को निशाने पर रखा। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए करीब 3,900 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मिली थी। शर्मा ने कांग्रेस सरकार के दौरान आवास निर्माण की रफ्तार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय बड़ी संख्या में गरीब परिवार पक्के मकान का इंतजार करते रह गए। विजय शर्मा ने मौजूदा सरकार का आंकड़ा सामने रखते हुए दावा किया कि ढाई साल में 11 लाख 75 हजार आवास पूरे किए जा चुके हैं।
उनके मुताबिक 18 लाख से ज्यादा आवास का संकल्प लिया गया और इनके लिए करीब 26 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है, जिसमें लगभग 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने हाल में 3.65 लाख नए आवास स्वीकृत होने की बात भी कही।
बघेल ने आंकड़ों पर उठाए सवाल
विजय शर्मा के दावों पर भूपेश बघेल ने भी पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अलग-अलग समय की स्वीकृतियों और पुराने आवासों को जोड़कर अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। बघेल ने दावा किया कि उनकी सरकार ने सात लाख आवास स्वीकृत किए थे और कोरोना काल समेत कई परिस्थितियों के कारण योजना की रफ्तार प्रभावित हुई। पूर्व CM ने बहस के दौरान केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना काल में राशि मिलने में समस्या आई और प्रधानमंत्री आवास योजना का पोर्टल भी बंद हुआ। बघेल का कहना था कि सिर्फ तैयार हुए मकानों का आंकड़ा देखने के बजाय अलग-अलग वर्षों में मिली स्वीकृतियों और प्रक्रियागत अड़चनों को भी हिसाब में शामिल किया जाना चाहिए।
आंकड़ों की परिभाषा पर उलझे दोनों नेता
बहस का बड़ा हिस्सा इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमता रहा कि किस सरकार के खाते में कितने मकान गिने जाएं। बघेल पुराने लक्ष्यों और स्वीकृतियों को वर्तमान सरकार के आंकड़ों में जोड़ने पर सवाल उठाते रहे, जबकि शर्मा ने कांग्रेस कार्यकाल में अधूरे रहे मकानों और मौजूदा सरकार में पूरे हुए निर्माण का हिसाब सामने रखा। यही वजह रही कि दोनों नेताओं के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई दिया।
मंच से बाहर भी चढ़ा सियासी पारा
करीब 80 मिनट की बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। इसका असर प्रेस क्लब के बाहर भी नजर आया, जहां बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की स्थिति बनी। इस तरह गरीबों के आवास से शुरू हुई बहस कुछ ही देर में प्रदेश की बड़ी राजनीतिक भिड़ंत में बदल गई। रायपुर प्रेस क्लब की यह बहस खत्म हो गई, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना पर सियासी लड़ाई फिलहाल थमती नहीं दिख रही।
बीजेपी मौजूदा सरकार में पूरे हुए मकानों को अपनी उपलब्धि बता रही है, जबकि कांग्रेस स्वीकृति, पुराने लक्ष्य और केंद्र की भूमिका का सवाल उठा रही है। इन राजनीतिक दावों के बीच असली मुद्दा उन परिवारों का है, जिनके लिए पक्के घर की उम्मीद ही इस पूरी योजना का आधार है।
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