Chambal Wildlife : उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से गुजरने वाली चंबल नदी अब लुप्तप्राय वन्यजीवों के संरक्षण का सफल मॉडल बनकर सामने आई है। बीते वर्षों में लगातार किए गए संरक्षण प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। घड़ियाल, मगरमच्छ, इंडियन स्किमर, बटागुर कछुए और गंगा डॉल्फिन जैसी दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही चंबल के बीहड़ अब ईको टूरिज्म के नए आकर्षण के रूप में भी तेजी से पहचान बना रहे हैं। वर्ष 1979 में चंबल नदी को लुप्तप्राय घड़ियालों के संरक्षण के लिए विशेष क्षेत्र घोषित किया गया था।
उस समय यहां घड़ियालों की संख्या महज 250 के आसपास थी। संरक्षण कार्यक्रमों और प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के चलते अब इनकी संख्या बढ़कर 2,938 तक पहुंच गई है। विशेषज्ञ इसे देश में वन्यजीव संरक्षण की बड़ी उपलब्धियों में शामिल मान रहे हैं।
Chambal Wildlife
चंबल नदी में मगरमच्छों की आबादी में भी तेजी से इजाफा हुआ है। पिछले एक वर्ष में इनकी संख्या 928 से बढ़कर 1,512 तक पहुंच गई। वहीं गंगा डॉल्फिन, जिसके संरक्षण के लिए 2009 में चंबल को महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में चुना गया था, उसकी संख्या भी 111 से बढ़कर 155 हो गई है। कभी लुप्तप्राय स्थिति में पहुंच चुका इंडियन स्किमर पक्षी भी अब बड़ी संख्या में दिखाई दे रहा है। वर्ष 2015 में जहां इनकी संख्या 224 थी, वहीं अब यह आंकड़ा लगभग 1,000 तक पहुंच गया है।
संरक्षण में मिली सफलता
चंबल नदी बटागुर कछुओं की दुर्लभ प्रजातियों के लिए भी सुरक्षित आवास बनी हुई है। यहां बटागुर की साल और ढोर दोनों प्रजातियां पाई जा रही हैं। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस की पूर्व संध्या पर किए गए अवलोकन में इन प्रजातियों की मौजूदगी और संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आए। बाह रेंज के वन अधिकारियों के अनुसार नदी क्षेत्र के अलावा बीहड़ के जंगलों में भी चीतल, सांभर और तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है। वन विभाग नियमित रूप से आसपास के गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने का प्रयास कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से संरक्षण अभियान को और मजबूती मिली है।
| प्रजातियां | 2023 | 2024 | 2025 |
|---|---|---|---|
| इंडियन स्किमर | 740 | 843 | 1,000 |
| घड़ियाल | 2,108 | 2,456 | 2,938 |
| मगरमच्छ | 878 | 928 | 1,512 |
| डॉल्फिन | 96 | 111 | 155 |
मिल रहा रोजगार
चंबल की शांत जलधारा, दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट और घड़ियाल-मगरमच्छों की प्राकृतिक मौजूदगी देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका और जर्मनी सहित कई देशों से पर्यटक यहां सफारी और बर्ड वॉचिंग के लिए पहुंच रहे हैं। चंबल सफारी से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पर्यटन सुविधाओं का और विस्तार किया जाए तो यह क्षेत्र ईको टूरिज्म का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
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