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UP चुनाव से पहले भाजपा की बड़ी रणनीति, MLC मंत्री अब लड़ेंगे विधानसभा चुनाव

UP BJP Strategy : उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बार विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ी रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी के अंदर चर्चा है कि ऐसे सभी मंत्री जो वर्तमान में विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं, उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ना अनिवार्य किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि पार्टी केवल मनोनीत या ऊपरी सदन की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर चुनावी मुकाबले को गंभीरता से ले रही है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा के पांच प्रमुख कैबिनेट मंत्री डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह, भूपेंद्र चौधरी, एके शर्मा और दारा सिंह चौहान वर्तमान में विधान परिषद के सदस्य हैं।

इन्हें विधानसभा चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। इन सभी को जनता के बीच सीधे चुनावी परीक्षा से गुजरना होगा। इससे पहले केशव प्रसाद मौर्य सिराथू से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें विधान परिषद भेजा गया था।

UP BJP Strategy

पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को भी विधानसभा चुनाव में उतारने की तैयारी है। माना जा रहा है कि ओबीसी समाज में कुर्मी बिरादरी से आने वाले चौधरी के मैदान में उतरने से पिछड़े वर्ग के बीच पार्टी का संदेश और मजबूत होगा। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है। अगर ऐसा होता है तो यह उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा, जबकि वे पहले सात बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। पार्टी का मानना है कि कद्दावर नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतारने से संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल का संदेश जाएगा।

वोट बैंक पर फोकस बढ़ा

इसके अलावा, यह भी संकेत देने की कोशिश है कि नेतृत्व केवल पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी जिम्मेदारी भी साझा करता है। कुछ वरिष्ठ नेताओं को विशेष परिस्थितियों में छूट दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है, लेकिन अधिकांश प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारने की रणनीति लगभग तय मानी जा रही है। बीते लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत में गिरावट के बाद भाजपा नेतृत्व सतर्क हो गया है। 2019 के मुकाबले राजग के मत प्रतिशत में लगभग नौ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि सपा गठबंधन के वोट शेयर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी। इसी कारण भाजपा अब अपने वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को सीधे विधानसभा चुनाव मैदान में उतारकर जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

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