Bargi Dam Accident : बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश पर्यटन निगम (MPT) की ओर से दिए गए बयान ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर बहस और तेज कर दी है। हादसे में कई लोगों की जान जाने के बाद भी सिस्टम पर सवाल कम होने का नाम नहीं ले रहे। जल क्रीड़ा गतिविधियों से जुड़े सलाहकार और रिटायर्ड नौसेना अधिकारी Rajendra Nigam ने कहा कि क्रूज पर सवार यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य नहीं था।

हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि नाव में पर्याप्त लाइफ जैकेट मौजूद थीं। इस बयान के बाद सुरक्षा नियमों के पालन पर सवाल और गहरा गए हैं। यह बयान उस समय सामने आया है जब Mohan Yadav ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं।
Bargi Dam Accident
30 अप्रैल को हुई इस घटना में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। 100 सीटों वाली नाव के मौसम चेतावनी के बावजूद चलने पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्रूज ऑपरेटरों पर आरोप है कि उन्होंने सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं लिया। जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो जवाब मिला कि लाइफबोट्स उपलब्ध थीं, लेकिन मौसम अचानक खराब हो गया। अधिकारियों का कहना है कि हालात इतने तेजी से बिगड़े कि प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं मिला।
आज जबलपुर में तेज आंधी-तूफान के कारण बरगी डैम में हुए दुखद क्रूज हादसे को लेकर स्थानीय प्रशासन एवं रेस्क्यू फोर्स का ऑपरेशन लगातार जारी है।
लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह जी, पर्यटन मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी जी, संभाग प्रभारी एसीएस, एडीजी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 30, 2026
बचाव कार्य पर भी उठे सवाल
बचाव अभियान को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आई हैं। दावा किया गया कि लाइफबोट्स भेजी गईं, लेकिन तब तक क्रूज डूब चुका था। इस देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या समय रहते कार्रवाई होती तो कुछ जानें बचाई जा सकती थीं। मौसम विभाग की चेतावनियों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। सलाहकार ने कहा कि अलर्ट हमेशा आसानी से उपलब्ध नहीं होते और हर बार उन्हें देख पाना संभव नहीं होता। इस बयान ने आपदा प्रबंधन की तैयारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वीकार की कमी
लाइफ जैकेट की उपलब्धता पर बात करते हुए यह भी स्वीकार किया गया कि अलग-अलग वजन के हिसाब से पर्याप्त विकल्प नहीं थे। छोटे, मीडियम और बड़े साइज तो मौजूद थे, लेकिन हर यात्री के लिए सही फिट उपलब्ध नहीं हो पाता था। इसे एक बड़ी कमी के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि अगली बार जब लाइफ जैकेट की खरीद होगी, तो उसमें अधिक विकल्प शामिल किए जाएंगे। ताकि हर यात्री के लिए सही साइज उपलब्ध हो सके और ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
इस पूरे मामले ने न केवल सुरक्षा इंतजामों, बल्कि जिम्मेदारी तय करने के मुद्दे को भी सामने ला दिया है। हादसे के बाद उठे सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है, लेकिन इतना साफ है कि इस घटना ने सिस्टम की कई कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
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