Bargi Dam Cruise Incident : मध्य प्रदेश के Bargi Dam में हुए क्रूज हादसे को लेकर एक नया वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में दिखता है कि शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक पानी तेजी से अंदर घुसने लगा। कुछ ही पलों में माहौल डर और अफरा-तफरी में बदल गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जैसे ही पानी भरना शुरू हुआ, यात्रियों में घबराहट फैल गई। बच्चे रोने लगे और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। क्रूज बुरी तरह हिचकोले खाने लगा, जिससे हालात और बिगड़ गए।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि जब क्रूज डूबने की स्थिति में पहुंचा, तब जाकर स्टाफ लाइफ जैकेट निकालता नजर आया। कई यात्रियों के पास जैकेट नहीं थी, जबकि कुछ लोग खुद स्टोरेज खोलकर उन्हें निकालने की कोशिश करते दिखे। इससे सुरक्षा इंतजामों की पोल खुल गई।
Bargi Dam Cruise Incident
Inland Vessels Act 2021 के तहत हर यात्री को यात्रा शुरू होने से पहले लाइफ जैकेट देना और पहनाना जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि क्रूज की क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे। जिसमें 29 टिकट के मुकाबले 40 से अधिक यात्री मौजूद थे। हादसे से पहले मौसम विभाग ने तेज आंधी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। करीब 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की चेतावनी के बावजूद क्रूज को पानी में उतार दिया गया। अब तक इस हादसे में 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
मां-बेटे की कहानी ने झकझोरा
इस हादसे की सबसे भावुक तस्वीर दिल्ली से आए एक परिवार की है। मरीना मैसी ने अपने चार साल के बेटे त्रिशान को अपनी ही लाइफ जैकेट में बांध लिया और आखिरी वक्त तक उसे सीने से लगाए रखा। जब दोनों के शव मिले, तब भी वे एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। यह दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला है। मरीना के पति प्रदीप मैसी ने बताया कि हादसे के वक्त स्टाफ केवल यात्रियों को बैठे रहने के लिए कहता रहा, लेकिन कोई ठोस मदद नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि उन्हें एक ट्यूब मिली, जिसकी मदद से वे किसी तरह किनारे तक पहुंच पाए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में हुई देरी
हादसे के बाद बचाव कार्य में भी लापरवाही सामने आई। जानकारी के मुताबिक, शाम 6:15 बजे सूचना मिलने के बावजूद पहली रेस्क्यू टीम 6:40 बजे तक रवाना नहीं हो सकी। तकनीकी दिक्कतों के चलते उपकरण बदलने पड़े, जिससे और देरी हुई। दूसरी रेस्क्यू टीम करीब 7 बजे रवाना हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि हादसे के बाद शुरुआती दो घंटे सबसे अहम होते हैं, लेकिन इसी दौरान हुई देरी कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है। अब इस पूरे मामले में जांच तेज कर दी गई है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
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