Avadh University : प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को लेकर किए गए आह्वान के बाद Dr. Rammanohar Lohia Avadh University ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में ऊर्जा खपत कम करने और पेट्रोल-डीजल की बचत को ध्यान में रखते हुए नई कार्य प्रणाली लागू कर दी है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब सोमवार से शुक्रवार तक ही अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय आएंगे। शनिवार को सभी विभागों में “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू रहेगी।
इस दौरान विश्वविद्यालय के कई प्रशासनिक कार्य ऑनलाइन माध्यम से संचालित किए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे कर्मचारियों की आवाजाही कम होगी और ईंधन की खपत में कमी आएगी।
Avadh University की नई पहल
शनिवार को केवल कार्यालयी कार्य ही नहीं बल्कि कक्षाएं भी ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएंगी। विश्वविद्यालय ने वर्क फ्रॉम होम के लिए सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक का समय निर्धारित किया है। दोपहर 1:30 बजे से 2 बजे तक लंच ब्रेक रहेगा। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े काम पहले की तरह जारी रहेंगे। जरूरत पड़ने पर किसी भी कर्मचारी को शनिवार के दिन कार्यालय बुलाया जा सकता है।
लेनी होगी अनुमति
विश्वविद्यालय ने कर्मचारियों के लिए एक अतिरिक्त निर्देश भी जारी किया है। आदेश के मुताबिक, वर्क फ्रॉम होम के दिन कोई भी कर्मचारी मुख्यालय छोड़ने से पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। प्रशासन का कहना है कि यह कदम कार्य व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
लिया गया फैसला
विश्वविद्यालय के कुलसचिव Vinay Kumar Singh ने बताया कि यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन के अनुसार 16 मई से यह नई व्यवस्था प्रभावी मानी जाएगी और उसी दिन से शनिवार का वर्क फ्रॉम होम शुरू हो जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस फैसले की जानकारी सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, निदेशकों और समन्वयकों को भेज दी है। इसके अलावा, अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध आसपास के जिलों के लगभग 500 महाविद्यालयों के प्राचार्यों को भी नई व्यवस्था से अवगत कराया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में डिजिटल कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में अन्य विश्वविद्यालय भी इसी तरह की व्यवस्था अपना सकते हैं।
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