Tamil Nadu Politics : तमिल सिनेमा से निकलकर राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले विजय थलापति की लोकप्रियता अब तमिलनाडु की सीमाओं के बाहर भी दिखाई देने लगी है। पश्चिम बंगाल और केरल में उनके समर्थकों की गतिविधियों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) अब दूसरे राज्यों में भी संगठन खड़ा करने की तैयारी कर रही है। इन अटकलों के बीच पार्टी को सामने आकर अपना रुख स्पष्ट करना पड़ा। TVK ने साफ किया है कि फिलहाल उसकी प्राथमिकता तमिलनाडु है और दूसरे राज्यों में राजनीतिक या संगठनात्मक विस्तार की कोई आधिकारिक योजना नहीं है।
पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान और केरल में विजय के कुछ समर्थकों की ओर से TVK के नाम पर गतिविधियां शुरू किए जाने की खबरें सामने आई थीं। समर्थकों ने पार्टी के बैनर और पोस्टर लगाए और कुछ जगहों पर कार्यालय शुरू करने का दावा भी किया।
Tamil Nadu Politics
इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या विजय दक्षिण भारत से बाहर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने जा रहे हैं। TVK ने इन चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि तमिलनाडु और पुडुचेरी के बाहर पार्टी के नाम पर शुरू किए गए किसी कार्यालय या संगठन को केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे कार्यक्रम स्थानीय समर्थकों की पहल हैं और इन्हें पार्टी की आधिकारिक विस्तार योजना का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए। विजय का तमिलनाडु के बाहर भी बड़ा फैन बेस रहा है। खासतौर पर केरल में उनकी फिल्मों को लंबे समय से अच्छा रिस्पॉन्स मिलता रहा है।
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी उनके प्रशंसकों के समूह सामाजिक कार्यक्रमों और फिल्म रिलीज के दौरान सक्रिय दिखाई देते रहे हैं। हालांकि, फैन क्लब को राजनीतिक संगठन में बदलना अलग चुनौती है। पार्टी फिलहाल इसी अंतर को बनाए रखना चाहती है।
प्रशंसक नेटवर्क से भी जुड़ा
तमिलनाडु में विजय का राजनीतिक आधार उनके पुराने प्रशंसक नेटवर्क से भी जुड़ा रहा है। फिल्मों के दौर में सक्रिय रहे फैन क्लबों ने बाद में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाई। इससे TVK को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करने में मदद मिली। लेकिन पार्टी नेतृत्व फिलहाल इसी नेटवर्क को तमिलनाडु में और मजबूत करने पर ध्यान देना चाहता है। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद विजय की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनी और विजय ने मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली। ऐसे में पार्टी का मौजूदा फोकस सरकार को स्थिर रखने और जनता से किए गए वादों पर काम करने पर है।
राजनीति की चर्चाएं
विजय को लेकर राष्ट्रीय राजनीति की चर्चाएं भी लगातार सामने आती रही हैं। उनके कुछ समर्थक और पार्टी से जुड़े उत्साही नेता 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर बड़े दावे कर चुके हैं। यहां तक कि विजय को भविष्य में प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में देखने की बातें भी समर्थकों के स्तर पर उठी हैं। हालांकि, TVK नेतृत्व ने अभी तक विजय को 2029 के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। तमिलनाडु में TVK और कांग्रेस के राजनीतिक संबंधों के कारण भी राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ी चर्चाओं पर नजर बनी हुई है। प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर समर्थकों के बयानों के बाद दोनों दलों के बीच संभावित मतभेद की अटकलें लगीं, लेकिन पार्टी स्तर पर राष्ट्रीय राजनीति को लेकर अभी कोई बड़ा औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।
राजनीतिक स्थिति मजबूत
विजय की मौजूदा रणनीति तमिलनाडु में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की दिखाई देती है। दूसरे राज्यों में लोकप्रियता होने के बावजूद TVK फिलहाल वहां संगठन बनाने की जल्दबाजी में नहीं है। पार्टी के सामने सरकार चलाने, अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने और आने वाले चुनावों के लिए संगठन तैयार करने जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल और केरल में समर्थकों की गतिविधियों के बाद आया TVK का स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पार्टी ने फिलहाल राष्ट्रीय विस्तार की अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है। विजय भविष्य में दिल्ली की राजनीति की तरफ कदम बढ़ाते हैं या तमिलनाडु तक अपना पूरा ध्यान सीमित रखते हैं, यह आने वाले वर्षों में पार्टी की रणनीति से स्पष्ट होगा।






