UP Election : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज होती दिखाई दे रही हैं। 403 विधानसभा सीटों वाले यूपी में सत्ता की लगातार तीसरी पारी हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी के सामने जहां अपने संगठन को मजबूत रखने की चुनौती है, वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल सहयोगी दलों की उम्मीदों को भी साधना होगा। ऐसे में सबसे अहम मुद्दा सीटों के बंटवारे का बनता नजर आ रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा 2027 के चुनाव में 300 से अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना सकती है।
इसके साथ ही सहयोगी दलों के लिए करीब 70 से 80 सीटें छोड़े जाने की संभावना पर भी मंथन चल रहा है। हालांकि सीटों की अंतिम संख्या अभी तय नहीं हुई है। माना जा रहा है कि नवंबर-दिसंबर 2026 के दौरान सहयोगी दलों के साथ कई दौर की बातचीत के बाद सीट शेयरिंग का अंतिम खाका सामने आ सकता है।
UP Election 2027
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी संख्या में सीटों पर खुद चुनाव लड़ा था। उस समय अपना दल (एस) और निषाद पार्टी उसके प्रमुख सहयोगियों में शामिल थे। अब 2027 के चुनाव में गठबंधन का दायरा पहले के मुकाबले बड़ा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल, पूर्वांचल में ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और निषाद पार्टी जैसे सहयोगी NDA के समीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। NDA के क्षेत्रीय सहयोगी ऐसी सीटों पर ज्यादा दावेदारी कर सकते हैं, जहां भाजपा का प्रदर्शन कमजोर रहा है या पार्टी लंबे समय से जीत के लिए संघर्ष करती रही है।
पश्चिमी यूपी में RLD, पूर्वांचल में सुभासपा और निषाद पार्टी तथा काशी-मिर्जापुर क्षेत्र में अपना दल (एस) का प्रभाव भाजपा के लिए चुनावी गणित में महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में सीटों के बंटवारे के दौरान क्षेत्रीय दल अपनी मजबूत पकड़ वाली सीटों पर समझौता नहीं करना चाहेंगे।
सहयोगियों का दबाव
भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि सहयोगी दलों को उनकी राजनीतिक ताकत के मुताबिक सीटें दी जाएं और साथ ही पार्टी का अपना चुनावी आधार भी कमजोर न पड़े। जयंत चौधरी की RLD पश्चिमी यूपी में, ओम प्रकाश राजभर की पार्टी पूर्वांचल में और अनुप्रिया पटेल का अपना दल (एस) कुछ खास इलाकों में प्रभाव रखता है। यही वजह है कि सीट शेयरिंग इस बार सामान्य औपचारिकता के बजाय बड़े राजनीतिक मंथन का विषय बन सकती है। सीटों के संभावित बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भाजपा पर हमला तेज कर दिया है।
विपक्षी दलों का कहना है कि NDA में शामिल क्षेत्रीय पार्टियों को उनकी ताकत के अनुपात में हिस्सेदारी नहीं मिल सकती। उनका दावा है कि चुनाव नजदीक आने के साथ गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर मतभेद सामने आ सकते हैं।
2027 में गठबंधन का असली इम्तिहान
फिलहाल भाजपा की प्राथमिकता संगठन और गठबंधन दोनों को चुनाव से पहले मजबूत करना है। 300 से ज्यादा सीटों पर खुद मैदान में उतरने की संभावित रणनीति यह संकेत देती है कि पार्टी अपनी चुनावी कमान बड़े स्तर पर अपने हाथ में रखना चाहती है। हालांकि सहयोगियों की मांग, क्षेत्रीय समीकरण और विपक्ष की रणनीति के बीच अंतिम सीट शेयरिंग फॉर्मूला क्या होगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा। इतना जरूर है कि 2027 का यूपी चुनाव शुरू होने से पहले ही NDA के भीतर सीटों का गणित सियासत का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
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