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Nepal Flood News: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर लैंडस्लाइड से तबाही, 168 की मौत; 400 से ज्यादा लापता

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Nepal Flood News : नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास बुधवार सुबह लैंडस्लाइड के बाद आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। हादसे में नेपाल में 165 और तिब्बत में 3 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 1,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में 826 लोगों का सुराग नहीं मिल पाया है। इनमें 105 भारतीय और 37 NRI शामिल हैं। चीन की सरकारी वेबसाइट CCTV के मुताबिक, तिब्बत में भी 550 से ज्यादा लोग लापता हैं।

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खराब मौसम, मलबे और कई जगह रास्ते टूटने के कारण राहत-बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला। इनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक हैं। एक सुरंग में फंसे 7 नेपाली नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया है।

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बता दें कि बुधवार सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास और काठमांडू के उत्तर में तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। इसी दौरान पहाड़ का बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ टूटकर ल्हेंदे खोला नदी में जा गिरा। इसके बाद USGS ने कहा कि यह भूकंप नहीं था। पहाड़ से हुआ लैंडस्लाइड इतना शक्तिशाली था कि उससे 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर झटका पैदा हुआ। वैज्ञानिकों को आशंका है कि ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने से यह घटना हुई हो सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक वजह सामने आने में कई सप्ताह लग सकते हैं।

बिहार और यूपी में बाढ़ का अलर्ट

नेपाल से आने वाली करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव को लेकर बिहार में अलर्ट है। इसका असर मुख्य रूप से गंडक नदी और उससे जुड़ी नदियों में दिखाई दे सकता है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होकर गंडक नदी तक पहुंचेगा, जिसके बाद बिहार के निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की आशंका है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी निगरानी रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी अलर्ट जारी किया गया है।

राष्ट्रपति पौडेल ने दिए निर्देश

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर रसुवा में भोटेकोशी बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने प्रभावित लोगों की तलाश, रेस्क्यू और राहत कार्य में सरकार की पूरी मशीनरी लगाने को कहा। प्रधानमंत्री ने उन्हें बताया कि बचाव, इलाज और राहत के लिए सभी सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियां मैदान में हैं।नेपाल में राहत कार्यों के लिए भारत ने 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां भेजी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल और नेपाली लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने आपदा में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना भी जताई।

1 हजार तक वाहन फंसे!

भोटेकोशी नदी में तेज पानी और भूस्खलन से नेपाल में कई सड़कें और राजमार्ग प्रभावित हुए हैं। करीब 800 से 1,000 गाड़ियां फंसने या डूबने की जानकारी है। इनमें लगभग 300 यात्री बसें शामिल हैं। गोसाईंकुंड जा रही 18 से 20 बसों से संपर्क नहीं हो पाने की खबर से चिंता और बढ़ गई है। नेपाल की यह घटना 2013 की केदारनाथ आपदा की याद दिलाती है, जब ग्लेशियर से जुड़ी चोराबाड़ी ताल टूटने के बाद पानी, चट्टान और मलबे ने बड़े इलाके में तबाही मचाई थी। अब नेपाल में भी राहत एजेंसियां मलबे में दबे और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।

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