House Property Mutation : छोटे मकान मालिकों के लिए गृहकर नामांतरण को लेकर बड़ी राहत मिली है। उत्तराधिकारी के तौर पर संपत्ति का दाखिल-खारिज कराने पर अब उन्हें पहले की तुलना में काफी कम शुल्क देना होगा। नगर निगम के प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी देते हुए नई शुल्क व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 10 दिन में भवन स्वामियों को इसका लाभ मिलने लगेगा।
नगर निगम में पारिवारिक संपत्तियों के गृहकर नामांतरण के लिए अभी तक 5 हजार रुपये शुल्क लिया जाता था। यह शुल्क ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छोटे मकान से लेकर 10 हजार वर्गफीट तक के बड़े बंगलों पर भी समान रूप से लागू था।
House Property Mutation
इससे छोटे मकान मालिकों पर संपत्ति के आकार के मुकाबले ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ता था। नई व्यवस्था में अब मकान के क्षेत्रफल के आधार पर शुल्क तय किया गया है।शासन की नई व्यवस्था के अनुसार 1000 वर्गफीट तक के मकान के नामांतरण पर 1000 रुपये शुल्क लगेगा। 1001 से 2000 वर्गफीट तक के लिए 2000 रुपये और 2001 से 3000 वर्गफीट तक के मकान के लिए 3000 रुपये देने होंगे। वहीं 3000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल वाली संपत्ति के नामांतरण पर अधिकतम 5000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
1 % लगता था शुल्क
करीब दो साल पहले तक नगर निगम संपत्ति के दाखिल-खारिज के लिए उसकी कीमत का एक फीसदी शुल्क लेता था। बाद में शासन के निर्देश पर इसे कम किया गया। एलडीए और आवास विकास की व्यवस्था की तर्ज पर बैनामे के आधार पर होने वाले नामांतरण का शुल्क भी घटाया गया था। हालांकि पैतृक संपत्ति, उत्तराधिकार और वसीयत के आधार पर नामांतरण कराने वालों को तब कोई विशेष राहत नहीं मिली थी।
शुल्क पहले जैसा रहेगा
बैनामे के आधार पर नामांतरण के लिए मौजूदा शुल्क व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पांच लाख रुपये तक की संपत्ति पर 3500 रुपये, पांच से 10 लाख रुपये तक 5500 रुपये, 10 से 20 लाख रुपये तक 7500 रुपये और 20 से 30 लाख रुपये तक 9500 रुपये शुल्क है। 30 लाख रुपये से अधिक कीमत की संपत्ति पर 10 हजार रुपये शुल्क निर्धारित है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह के मुताबिक वसीयत और उत्तराधिकार के आधार पर गृहकर नामांतरण का शुल्क शासन ने कम कर दिया है।
आदेश जारी होने के बाद अब नगर निगम के सॉफ्टवेयर में नई शुल्क व्यवस्था के अनुसार बदलाव किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब 10 दिन में भवन स्वामियों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
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