UP Unique Animal : उत्तर प्रदेश अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां जंगलों से लेकर खेतों और नदी-तालाबों के आसपास कई तरह के वन्यजीव पाए जाते हैं। इन्हीं में एक ऐसा जीव भी है, जिसे आम बोलचाल में ‘कबर बिज्जू’ कहा जाता है। इसके नाम से ही इसके बारे में कई तरह की कहानियां जुड़ी हुई हैं। कबर बिज्जू का नाम सुनते ही लोगों के मन में कब्र खोदकर शव खाने वाले जानवर की तस्वीर बनने लगती है। हालांकि, इसकी पूरी पहचान इतनी सीधी नहीं है। यह एक सर्वाहारी वन्यजीव है, जिसका भोजन कीड़े-मकोड़े, छोटे जीव, फल और अन्य उपलब्ध खाद्य पदार्थ हो सकते हैं। कब्र खोदने की क्षमता के कारण स्थानीय स्तर पर इसे यह नाम मिला है।
यह जीव जमीन खोदने में काफी माहिर माना जाता है। इसके आगे के पंजे मजबूत होते हैं, जिनकी मदद से यह मिट्टी हटाकर अपना ठिकाना तैयार करता है। आमतौर पर नदी और तालाबों के किनारे, जंगलों तथा खेतों के आसपास इसकी मौजूदगी देखी जा सकती है।
UP Unique Animal
कई बार यह सुनसान जगहों, पुराने मकानों और खाली इमारतों के आसपास भी दिखाई दे जाता है। कबर बिज्जू के शरीर का रंग आमतौर पर भूरा दिखाई देता है और इसके सिर या माथे के हिस्से पर हल्की सफेद धारियां नजर आती हैं। जमीन खोदते समय यह आगे के पैरों से मिट्टी हटाता है और पीछे के पैरों की मदद से उसे बाहर करता है। इसकी इसी आदत के कारण यह जमीन के भीतर लंबी मांद बनाने में सक्षम होता है।
इंसानों के लिए खतरनाक
कबर बिज्जू सामान्य तौर पर इंसानों से दूरी बनाए रखना पसंद करता है और खतरा महसूस होने पर भागने की कोशिश करता है। हालांकि, किसी जंगली जानवर को घेरने या उकसाने पर उसके व्यवहार में आक्रामकता आ सकती है। इसलिए आबादी के आसपास दिखाई देने पर उसे पकड़ने या परेशान करने के बजाय वन विभाग को सूचना देना बेहतर होता है। उत्तर प्रदेश में इस वन्यजीव की मौजूदगी हापुड़, मथुरा, फर्रुखाबाद, इटावा और प्रयागराज जैसे इलाकों में दर्ज किए जाने की बात सामने आती रही है। आबादी के आसपास इसकी मौजूदगी इसलिए भी नजर आ सकती है क्योंकि खेत, पुराने भवन और जंगल से सटे इलाके इसे भोजन और छिपने की जगह उपलब्ध कराते हैं।
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