UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन (ARV) और एंटी रैबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (ARIG) का पर्याप्त स्टॉक रखना अनिवार्य होगा। यदि किसी मरीज को अस्पताल पहुंचने पर वैक्सीन उपलब्ध नहीं मिलती है, तो संबंधित अस्पताल अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों (सीएमओ) और अस्पताल अधीक्षकों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। यह फैसला अस्पतालों और स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती मौजूदगी तथा डॉग बाइट की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद लिया गया है।
निर्देशों में कहा गया है कि किसी भी अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन का स्टॉक खत्म नहीं होना चाहिए। जैसे ही उपलब्ध स्टॉक दो से तीन दिन का रह जाए, तत्काल नई खेप की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
UP News
सरकार ने अस्पताल परिसरों को आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं से मुक्त रखने के लिए भी नई व्यवस्था लागू की है। प्रत्येक अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो परिसर में आवारा पशुओं की निगरानी, साफ-सफाई और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर उन्हें हटाने की जिम्मेदारी संभालेगा। नोडल अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज और उनके परिजन सीधे संपर्क कर सकें।
लागू होंगे निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदेश के सभी पंजीकृत निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और मल्टी स्पेशियलिटी अस्पतालों को भी अपने परिसर में आवारा जानवरों के प्रवेश पर रोक लगाने और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करने होंगे। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद अनुपालन संबंधी शपथ पत्र महानिदेशालय को भेजा जाए। सरकार का उद्देश्य अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा डॉग बाइट जैसी घटनाओं की रोकथाम करना है।
Read More : Sawan में 44 किमी शिव मंदिर परिक्रमा मार्ग पर मुश्किल, 12 किलोमीटर सड़क बदहाल; भक्तों को चोट का खतरा




