Agra News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा व्यवस्था और अध्ययन संस्कृति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समय के साथ विश्वविद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल कमजोर होता जा रहा है। पहले पुस्तकालय केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होते थे, बल्कि विद्यार्थियों को संदर्भ पुस्तकों के माध्यम से गहन और प्रामाणिक ज्ञान हासिल करने के लिए प्रेरित किया जाता था। आज स्थिति यह है कि अधिकांश पुस्तकालय खाली दिखाई देते हैं, जहां न शिक्षक पहुंच रहे हैं और न ही विद्यार्थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि ज्ञान का विस्तार करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले छात्र पाठ्यक्रम के साथ-साथ विभिन्न विषयों की संदर्भ पुस्तकों का अध्ययन करते थे, जिससे उनकी समझ व्यापक होती थी।
Agra में CM की चिंता
उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से पुस्तकालयों की संस्कृति को फिर से जीवंत बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अध्ययन की यह परंपरा बेहद आवश्यक है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले शिक्षक जनगणना जैसे कार्यों के माध्यम से गांव-गांव जाकर समाज की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को करीब से समझते थे। इससे उनका समाज से सीधा जुड़ाव बना रहता था और अनुभव भी समृद्ध होता था। उन्होंने कहा कि जब से शिक्षकों को ऐसे कार्यों से अलग किया गया, तब से उनका सामाजिक संपर्क भी सीमित हो गया है। समाज और शिक्षा के बीच यह संबंध मजबूत रहना चाहिए।
विद्यार्थियों की जिम्मेदारी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय में अध्ययन या अध्यापन करने वाले व्यक्ति को अपने संस्थान के इतिहास, संस्थापकों, पूर्व कुलपतियों और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपने ही विश्वविद्यालय की विरासत का ज्ञान नहीं है, तो यह संस्थान और स्वयं उनके प्रति भी अन्याय है। अपनी शैक्षणिक परंपराओं और उपलब्धियों से परिचित होना हर छात्र और शिक्षक की जिम्मेदारी है।
रोचक बनाने की सलाह
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि नए शैक्षणिक सत्र की पहली कक्षा केवल पाठ्यक्रम शुरू करने तक सीमित न रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि पहली कक्षा परिचयात्मक, प्रेरणादायक और संवादपूर्ण होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों में विषय के प्रति जिज्ञासा पैदा हो और शिक्षक के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो। उन्होंने कहा कि जब भी भारत में गुरु-शिष्य परंपरा मजबूत हुई है, तब देश ने शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
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