MP Politics : मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा नाम फिर चर्चा के केंद्र में है, जिसके पास फिलहाल न विधानसभा की सदस्यता है और न ही सरकार में कोई पद। इसके बावजूद भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा से नेताओं की लगातार मुलाकातें राजनीतिक गलियारों में सवाल खड़े कर रही हैं। बताया जा रहा है कि महज 11 दिनों के भीतर सात बड़े नेता उनसे मिल चुके हैं। इनमें मंत्री, विधायक, संगठन से जुड़े पदाधिकारी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर नरोत्तम मिश्रा के साथ अचानक इतनी राजनीतिक गर्माहट क्यों दिखाई दे रही है। लगातार हो रही मुलाकातों को लेकर नरोत्तम मिश्रा ने इसे फिलहाल सामान्य और दोस्ताना मुलाकात बताया है।
उनका कहना है कि वह करीब तीन दशक तक विधायक रहे और पांच बार मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इस लंबे राजनीतिक सफर के दौरान अलग-अलग नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध बने हैं। इसलिए नेताओं का उनसे मिलना कोई असामान्य बात नहीं है।
MP Politics
हालांकि, राजनीति में नेताओं की मुलाकातों को अक्सर उनके सार्वजनिक बयानों से कहीं ज्यादा गंभीरता से देखा जाता है। भविष्य में अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर नरोत्तम मिश्रा ने क्रिकेट का उदाहरण देकर अपनी स्थिति साफ करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वह खुद को पार्टी का कार्यकर्ता मानते हैं। पार्टी का नेतृत्व उन्हें जहां जिम्मेदारी देगा, वह वहीं पूरी ईमानदारी से काम करेंगे। चाहे उन्हें मिड विकेट पर खड़ा किया जाए, गेंदबाजी की जिम्मेदारी मिले या विकेटकीपिंग करनी हो, उनका काम पार्टी के फैसले के मुताबिक अपनी भूमिका निभाना होगा।
तारीफ ने खींचा ध्यान
इन राजनीतिक मुलाकातों के बीच नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार प्रदेश के दौरे कर रहे हैं और जमीन पर जाकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं। नरोत्तम ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक बताया। प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था मुख्यमंत्री के पास है और स्थिति ठीक है।
चुनावी हार के बाद बदली तस्वीर
2023 विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से हार के बाद नरोत्तम मिश्रा की सक्रिय राजनीति में कई बदलाव देखने को मिले। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें भाजपा की न्यू जॉइनिंग टोली का प्रदेश संयोजक बनाया गया। उनके दावे के अनुसार, इस अभियान के दौरान 2।58 लाख से ज्यादा लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली। इसके बाद राज्यसभा और प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए भी उनका नाम चर्चा में रहा, लेकिन दोनों जगह पार्टी ने दूसरे नेताओं पर भरोसा जताया।
आज भोपाल निवास पर मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री, वरिष्ठ भाजपा नेता एवं मेरे प्रिय मित्र श्री जगदीश देवड़ा जी का सप्रेम सौजन्य आगमन हुआ।
इस अवसर पर विभिन्न समसामयिक विषयों पर उनके साथ सकारात्मक एवं सार्थक चर्चा हुई।@JagdishDevdaBJP pic.twitter.com/MLZJu2RADg— Dr Narottam Mishra (@drnarottammisra) September 9, 2026
2026 के दतिया उपचुनाव में भी नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिला। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद नरोत्तम की अगली राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं। इसी दौरान पार्टी के कई नेताओं के उनके घर पहुंचने से सियासी गलियारों में अलग-अलग कयास लगाए जाने लगे हैं।
यूपी चुनाव से जुड़ रहा मामला
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस पूरे घटनाक्रम के एक दूसरे पहलू पर भी है। मार्च 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं और वहां ब्राह्मण मतदाताओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा इस वर्ग को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। हाल में दिनेश शर्मा को राज्यपाल बनाए जाने के फैसले को भी कुछ विश्लेषक इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखते हैं।
अभी सस्पेंस कायम
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक भाजपा में फिलहाल किसी बड़े बदलाव या अंदरूनी उठापटक के संकेत नहीं हैं। पार्टी में बड़े फैसले हाईकमान के स्तर पर होते हैं और संगठनात्मक अनुशासन के कारण नेता सार्वजनिक तौर पर बहुत कुछ नहीं कहते। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा से नेताओं की मुलाकातों का असली मतलब क्या है, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि बिना किसी संवैधानिक या सरकारी पद के भी उनकी राजनीतिक सक्रियता ने मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चाओं को फिर हवा दे दी है।
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