Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy : अयोध्या स्थित Ram Mandir Ayodhya एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शुक्रवार को अयोध्या दौरे की तैयारी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। मुख्यमंत्री मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे, लेकिन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को उनके कार्यक्रम से दूर रखने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासन की ओर से जारी प्रोटोकॉल में यह उल्लेख किया गया है कि चंपत राय से अनुरोध किया गया है कि वे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करें। साथ ही इसकी जानकारी ड्यूटी मजिस्ट्रेट को देने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था ने मंदिर ट्रस्ट की भूमिका को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) लगातार सक्रिय है और चौथे दिन भी टीम राम मंदिर परिसर पहुंची। सूत्रों के मुताबिक, टीम ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से पूछताछ कर सकती है। चढ़ावा राशि की गिनती, रिकॉर्ड और कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर कई सवाल जांच के दायरे में हैं।
Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy
सूत्रों का यह भी दावा है कि आने वाले समय में राम मंदिर प्रशासन में काशी विश्वनाथ मंदिर की तरह CEO नियुक्त करने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दान, लेखा-जोखा और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है। फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय सरकार और ट्रस्ट स्तर पर विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। इस विवाद के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय अयोध्या पहुंचे और आरोप लगाए कि चढ़ावे से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है। वहीं, विपक्षी दलों की ओर से भी इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
रिकवरी और जांच में सामने आए नाम
जांच में अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर शामिल हैं। इनसे जुड़े मामलों में अब तक लगभग दो करोड़ रुपये की बरामदगी की बात सामने आई है। ये सभी लोग दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कार्यों में तैनात थे। इस मामले को लेकर पहले भी राजनीतिक बयानबाजी हो चुकी है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने करोड़ों रुपये की अनियमितता के आरोप लगाए थे, जबकि ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया था। बाद में जांच की मांग तेज होने पर प्रधानमंत्री कार्यालय तक मामला पहुंचा और रिपोर्ट तलब की गई थी।
अयोध्या में चढ़ावा विवाद ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है, बल्कि राजनीतिक माहौल को भी गर्म कर दिया है। SIT जांच के आगे बढ़ने के साथ ही आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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