Simhastha-2028 : महाकुंभ सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन में तैयारियां अब जमीन पर तेजी से दिखाई देने लगी हैं। शनिवार सुबह प्रशासनिक अधिकारी खुद शिप्रा नदी के किनारे पहुंचे और निर्माणाधीन घाटों तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर हालात का जायजा लिया। संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने अधिकारियों की टीम के साथ त्रिवेणी घाट से सांवराखेड़ी तक करीब छह किलोमीटर लंबी पदयात्रा की।
इस दौरान अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर यह समझने की कोशिश की कि करोड़ों श्रद्धालु नए घाटों तक किस तरह पहुंचेंगे और स्नान के बाद सुरक्षित तरीके से बाहर निकल पाएंगे। निरीक्षण के बाद हर 200 मीटर पर पहुंच मार्ग बनाने और निकासी के लिए करीब 30 स्थान चिन्हित करने का निर्णय लिया गया।
Simhastha-2028 की तैयारियां तेज
शिप्रा नदी के किनारे इस समय 778 करोड़ रुपये की लागत से करीब 29.21 किलोमीटर लंबे नए घाटों का निर्माण किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य केवल घाट तैयार करना नहीं, बल्कि सिंहस्थ के दौरान भीड़ को व्यवस्थित तरीके से संभालना भी है। अधिकारियों का मानना है कि अगर घाटों तक पहुंच आसान और व्यवस्थित होगी, तो श्रद्धालुओं की भीड़ एक ही स्थान पर जमा नहीं होगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था बेहतर रहेगी और हादसों की संभावना भी कम होगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कई जगहों पर नए रास्तों और चौड़ी एप्रोच रोड की जरूरत महसूस की।
घाटों तक पहुंचने वाले रास्तों पर रहेगा खास फोकस
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्देश दिए कि घाटों तक जाने वाले सभी मार्ग चौड़े, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाए जाएं। प्रशासन चाहता है कि श्रद्धालुओं को घाट तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।योजना के तहत एप्रोच रोड पर टॉयलेट, चेंजिंग रूम, पेयजल, रोशनी और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्रशासन इस बात पर भी जोर दे रहा है कि स्नान के बाद श्रद्धालु बिना किसी अफरा-तफरी के आसानी से बाहर निकल सकें। इसके लिए अलग-अलग निकासी मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विश्वस्तरीय सिंहस्थ के लिए वैज्ञानिक प्लानिंग
संभागायुक्त आशीष सिंह ने कहा कि सिंहस्थ-2028 को अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन बनाने के लिए केवल घाटों का निर्माण काफी नहीं है। श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित करना भी उतना ही जरूरी है।
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सहज स्नान सुविधा देना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी वजह से हर पहुंच मार्ग का चयन मौके की स्थिति को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, यूडीए सीईओ संदीप सोनी और एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर समेत कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में सिंहस्थ महापर्व 2028 के लिए CSR सहयोग पर उद्योगपतियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित।
30 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने हेतु उद्योग जगत से अपील। pic.twitter.com/HDDnUaHA3D
— Collector Ujjain (@collectorUJN) April 25, 2026
मानसून बना सबसे बड़ी चुनौती
सिंहस्थ-2028 के लिए शिप्रा नदी किनारे घाटों की कुल लंबाई 9 किलोमीटर से बढ़ाकर लगभग 40 किलोमीटर की जा रही है। इसके तहत 29.21 किलोमीटर लंबे नए घाट विकसित किए जा रहे हैं। हालांकि इस मेगा प्रोजेक्ट के सामने मानसून सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश शुरू होने से पहले खुदाई, बेस निर्माण, रिटेनिंग स्ट्रक्चर और पुलों के पिलर फाउंडेशन जैसे अहम काम पूरे करना जरूरी है। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर भारी मशीनों का संचालन मुश्किल हो जाएगा, जिससे निर्माण की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। फिलहाल प्रोजेक्ट का करीब 30 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और पूरी योजना को 18 नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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