Ujjain Mahakal : उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत देने के लिए मंदिर प्रशासन ने नई व्यवस्था शुरू की है। ग्रीष्म ऋतु में बढ़ते तापमान को देखते हुए मंदिर परिसर और महाकाल महालोक में हीट प्रूफ पाथवे तैयार कराया जा रहा है। इस विशेष पथ पर चलने से श्रद्धालुओं के पैर गर्म फर्श से नहीं जलेंगे और दर्शन के दौरान उन्हें अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि मंदिर समिति अध्यक्ष एवं कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देश पर यह कार्य कराया जा रहा है। लगभग 13 हजार स्क्वेयर फीट क्षेत्र में सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट आधारित हीट प्रूफ पाथवे तैयार किया जा रहा है।
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बता दें कि यह पथ नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर होते हुए शंख द्वार और बड़ा गणेश मंदिर तक बनाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था विशेष रूप से दर्शन मार्ग पर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए काफी लाभकारी साबित होगी। हर साल गर्मियों में मंदिर परिसर की फर्श अत्यधिक गर्म हो जाती है, जिससे नंगे पैर चलने वाले श्रद्धालुओं को काफी दिक्कत होती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था से श्रद्धालु बिना असुविधा के सुरक्षित और आरामदायक तरीके से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। खासतौर पर दोपहर के समय आने वाले भक्तों को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
नगर निगम ने जारी किया टेंडर
महाकाल मंदिर के पीछे स्थित ऐतिहासिक रुद्र सागर की सफाई के लिए उज्जैन नगर निगम ने भी तैयारी तेज कर दी है। निगम के स्वास्थ्य विभाग ने रुद्र सागर से जलकुंभी निकालने और उसके निपटान के लिए वार्षिक सफाई का टेंडर जारी किया है। इस कार्य के लिए करीब 14.55 लाख रुपये की लागत तय की गई है। प्रशासन का कहना है कि एक वर्ष तक नियमित सफाई का काम किया जाएगा ताकि सागर की स्वच्छता बनी रहे।
ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा है रुद्र सागर
रुद्र सागर उज्जैन के पौराणिक सप्त सागरों में शामिल माना जाता है। इसके मध्य में सम्राट विक्रमादित्य और उनके नौ रत्नों की प्रतिमा स्थापित है, जो क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को दर्शाती है। महाकाल महालोक बनने के बाद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है, ऐसे में सागर की स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी बन गया है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि केवल टेंडर जारी करना पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि सफाई कार्य की लगातार निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद रुद्र सागर अक्सर जलकुंभी से ढका रहता है, जिससे इसकी सुंदरता और धार्मिक महत्व प्रभावित होता है।
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