Sarojini Market : सरोजिनी मार्केट लंबे समय से दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं के बीच फैशन का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है। यहां रोजाना हजारों लोग शॉपिंग करने पहुंचते हैं। जिसकी वजह कम कीमत में ट्रेंडी और ब्रांडेड कपड़े है। कई बार यहां ऐसे कपड़े मिल जाते हैं जिनकी कीमत बड़े मॉल या ऑनलाइन साइट्स पर हजारों रुपये होती है, लेकिन यही सामान यहां कुछ सौ रुपये में बिकता दिखाई देता है। फैशनेबल टॉप, जींस, जैकेट और विदेशी ब्रांड्स के आउटफिट्स यहां बेहद कम दाम में आसानी से मिल जाते हैं।

इसी वजह से सरोजिनी मार्केट को लेकर कई तरह की बातें भी चर्चा में रहती हैं। इनमें सबसे ज्यादा वायरल अफवाह यह है कि यहां बिकने वाले कपड़े विदेशों से आए मरे हुए लोगों के होते हैं। हालांकि, सच्चाई इससे काफी अलग बताई जाती है।
Sarojini Market
फैशन इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों के मुताबिक सरोजिनी जैसे बाजारों में कम कीमत का सबसे बड़ा कारण “एक्सपोर्ट सरप्लस स्टॉक” होता है। दरअसल, बड़ी इंटरनेशनल कंपनियां बाजार की मांग से ज्यादा कपड़े तैयार कर लेती हैं। कई बार ऑर्डर पूरा होने के बाद अतिरिक्त स्टॉक बच जाता है। कंपनियां इस बचे हुए माल को नष्ट करने की बजाय थोक व्यापारियों को बेहद कम कीमत पर बेच देती हैं। इसके बाद यही कपड़े लोकल मार्केट में पहुंचते हैं। यही कारण है कि कई बार मशहूर विदेशी ब्रांड्स के टैग वाले कपड़े सरोजिनी मार्केट में बहुत कम कीमत पर दिखाई देते हैं।
रिजेक्ट हो जाता है पूरा स्टॉक
ब्रांडेड कंपनियां अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी को लेकर काफी सख्त रहती हैं। अगर कपड़ों में मामूली सी भी गड़बड़ी हो जाए तो पूरा बैच रिजेक्ट कर दिया जाता है। इन गलतियों में हल्की सिलाई खराब होना, धागा निकलना, बटन का टेढ़ा होना, रंग में थोड़ा फर्क या छोटा सा दाग शामिल हो सकता है। आम ग्राहक शायद इन कमियों को आसानी से नोटिस भी न कर पाए, लेकिन बड़े ब्रांड ऐसे कपड़ों को अपने शो-रूम में नहीं बेचते। इसके बाद व्यापारी इन रिजेक्टेड कपड़ों को सस्ते दाम में खरीद लेते हैं और लोकल मार्केट में बेचते हैं। सरोजिनी नगर जैसे बाजारों में मिलने वाले कई कपड़े इसी श्रेणी के होते हैं।
क्यों फैलती हैं अफवाहें?
कुछ बाजारों में सेकेंड हैंड या इस्तेमाल किए गए कपड़े भी बिकते हैं। ये कपड़े कई बार विदेशों से दान या थोक रीसेल चैनलों के जरिए भारत पहुंचते हैं। ऐसे कपड़े अक्सर वजन के हिसाब से खरीदे और बेचे जाते हैं, इसलिए उनकी कीमत बेहद कम होती है। इसी वजह से लोगों के बीच यह अफवाह फैल गई कि ये कपड़े मरे हुए लोगों के होते हैं।
हालांकि अब तक ऐसी किसी बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स और फैशन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बाजारों में मिलने वाले ज्यादातर सस्ते कपड़े एक्सपोर्ट सरप्लस, रिजेक्टेड स्टॉक या ओवरप्रोडक्शन का हिस्सा होते हैं।
युवाओं की पहली पसंद
कम बजट में फैशनेबल कपड़े खरीदने वालों के लिए सरोजिनी मार्केट आज भी सबसे पसंदीदा जगहों में शामिल है। कॉलेज स्टूडेंट्स से लेकर सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स तक यहां ट्रेंडी आउटफिट्स की तलाश में पहुंचते हैं। हर हफ्ते यहां नया स्टॉक आता है और कम कीमत के कारण लोग बिना ज्यादा खर्च किए नए फैशन ट्राय कर लेते हैं। यही वजह है कि दिल्ली का यह बाजार आज भी देश के सबसे चर्चित स्ट्रीट फैशन मार्केट्स में गिना जाता है।
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