Natural Disasters : भारतीय रिज़र्व बैंक ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कर्जदारों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे ग्राहकों के औपचारिक अनुरोध का इंतजार किए बिना ही राहत उपाय लागू कर सकते हैं। इस कदम का मकसद आपदा के समय लोगों को तुरंत आर्थिक सहारा देना है, ताकि उन्हें कागजी प्रक्रिया में उलझना न पड़े।
आरबीआई के नए निर्देशों के तहत बैंक खुद पहल करते हुए प्रभावित कर्जदारों के लिए ‘रिज़ॉल्यूशन प्लान’ लागू कर सकेंगे। ग्राहकों को राहत पाने के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। यह फैसला खासतौर पर उन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जब आपदा के बाद लोग आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में होते हैं।
Natural Disasters
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल उन खातों को मिलेगी, जो आपदा के समय ‘स्टैंडर्ड अकाउंट’ की श्रेणी में आते हैं। यानी जिन कर्जदारों का भुगतान 30 दिनों से ज्यादा समय तक लंबित नहीं था, वही इस योजना के तहत राहत के पात्र होंगे। इससे सुनिश्चित किया गया है कि सुविधा का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। बैंकों को यह अधिकार दिया गया है कि वे ग्राहकों की स्थिति के अनुसार कई तरह की राहत दे सकते हैं। इसमें EMI को रीशेड्यूल करना, कर्ज चुकाने में मोहलत (मोरेटोरियम) देना, बकाया ब्याज को नए लोन में बदलना या अतिरिक्त कर्ज उपलब्ध कराना शामिल है। इससे प्रभावित लोगों को अपनी वित्तीय स्थिति संभालने का समय मिल सकेगा।
ऑप्ट-आउट का भी रहेगा विकल्प
अगर कोई कर्जदार इस सुविधा का लाभ नहीं लेना चाहता, तो उसे इससे बाहर निकलने का विकल्प भी दिया गया है। आपदा घोषित होने की तारीख से 135 दिनों के भीतर ग्राहक इस योजना से बाहर हो सकता है। इससे ग्राहकों को अपनी जरूरत के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है। आरबीआई द्वारा जारी दिशा-निर्देश 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे। ये नियम कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक, एनबीएफसी और अन्य वित्तीय संस्थानों पर लागू होंगे। इससे पूरे बैंकिंग सिस्टम में एक समान नीति लागू की जा सकेगी।
आपदाओं का बढ़ता असर
आरबीआई ने यह कदम खेती, इंफ्रास्ट्रक्चर और आम लोगों की आय पर मौसम आधारित आपदाओं के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उठाया है। बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक घटनाओं के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह नीति बनाई गई है। नई गाइडलाइंस में उन सभी आपदाओं को शामिल किया गया है, जिन्हें राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत मान्यता प्राप्त है। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि ज्यादा से ज्यादा प्रभावित लोगों को इस राहत योजना का लाभ मिल सके।
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