Kashmir Earthquake : शनिवार सुबह कश्मीर घाटी में भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 5.3 मापी गई। झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए और कुछ देर तक डर का माहौल बना रहा। अधिकारियों के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र बदाखशान प्रांत (अफगानिस्तान) में था। यह झटका जमीन के काफी अंदर, करीब 190 किलोमीटर की गहराई में आया। इसकी लोकेशन 36.55 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70.92 डिग्री पूर्वी देशांतर बताई गई है।
कश्मीर घाटी भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यह इलाका हाई सिस्मिक जोन में आता है, जहां जमीन के नीचे प्लेटों की हलचल ज्यादा रहती है। इसी वजह से यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं।
Kashmir में फिर कांपी धरती
कश्मीर में भूकंप का इतिहास काफी खतरनाक रहा है। 8 अक्टूबर 2005 को आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इसकी तीव्रता 7.6 थी और इसका केंद्र मुजफ्फराबाद में था। इस आपदा में 80 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी और कई शहर बर्बाद हो गए थे। इतिहास में भी कश्मीर कई बड़े भूकंप झेल चुका है। साल 1555 का भूकंप बेहद विनाशकारी माना जाता है, जिसने कई इलाकों को तबाह कर दिया था। वहीं, 1885 में आए भूकंप में भी हजारों लोगों की जान गई और भारी नुकसान हुआ। 1885 के भूकंप का असर खासतौर पर बारामूला और श्रीनगर में देखा गया था। इस दौरान 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई और कई इमारतें ढह गईं। इसके अलावा 1828 में भी एक बड़ा भूकंप आया था, जिसने क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाया था।
विशेषज्ञों की चेतावनी
भूकंप विशेषज्ञ और इंजीनियर लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि कश्मीर में भूकंप-रोधी निर्माण जरूरी है। उनका मानना है कि पारंपरिक सीमेंट-कंक्रीट की इमारतें भूकंप के झटकों को सहन नहीं कर पातीं और जल्दी ढह जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बड़े नुकसान से बचने के लिए भूकंप-रोधी तकनीक से घर और इमारतें बनानी होंगी। इसके साथ ही लोगों को भी जागरूक रहने और आपदा से निपटने के तरीकों को समझने की जरूरत है।
भूकंप का यह झटका भले ही ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाया, लेकिन इसने एक बार फिर याद दिलाया है कि कश्मीर जैसे क्षेत्रों में सतर्कता बेहद जरूरी है। आने वाले समय में बेहतर तैयारी ही ऐसी आपदाओं से बचाव का सबसे बड़ा तरीका हो सकती है।
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