Budha Pradosh Vrat:- बुध प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ही खास महत्व होता है। आज ही के दिन वैदिक पंचांग के मुताबिक 15 अप्रैल को बुध प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि मनाई जा रही है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा आराधना करने का विधि विधान है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। जानकारी के मुताबिक हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा अर्चना संध्या काल में की जाती है।
कहां जाता है कि ऐसा करने से भय से मुक्ति मिल जाती है और सभी कष्टों का नाश होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन भगवान शिव की पूजा आराधना करने से सभी संकट दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान शिव की पूजा आराधना पूरे श्रद्धा भाव के साथ करने से व्यापार में सफलता मिलती है और करियर को नहीं ऊंचाइयां मिलती है साथ ही सुख समृद्धि बनी रहती है।
शिव जी की आरती
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥
माता पार्वती की आरती
जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता
सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
देवन अरज करत हम चित को लाता
गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।
Read More:- मासिक शिवरात्रि पर जरूर करें यह कार्य, शत्रुओं का होगा नाश और कंगाली से मिलेगा छुटकारा





