Congress News : कांग्रेस ने पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि ताजिकिस्तान में स्थित ऐनी एयरबेस के बाद अब ईरान के चाबहार बंदरगाह तक भारत की पहुंच कमजोर होना देश की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक यह घटनाक्रम क्षेत्रीय रणनीति और कूटनीतिक प्रभाव के लिहाज से चिंताजनक है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार के लिए नीतिगत निरंतरता बेहद महत्वपूर्ण होती है, लेकिन मौजूदा नेतृत्व इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखता।
Congress का सरकार पर निशाना
उनका आरोप है कि विदेश नीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर अब स्पष्टता की कमी दिखाई दे रही है। कांग्रेस का कहना है कि Chabahar Port से जुड़ा प्रोजेक्ट कोई नया विचार नहीं था। इसकी शुरुआत पिछली सदी के आखिरी वर्षों में भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच सहयोग बढ़ाने की रणनीति के तहत हुई थी। इस परियोजना का मकसद मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक भारत की सीधी पहुंच बनाना था, जिससे व्यापार और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा मिल सके।
2013 में निवेश को मिली थी मंजूरी
कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि मई 2013 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चाबहार परियोजना में करीब 11.5 करोड़ डॉलर के निवेश को मंजूरी दी थी। उस समय भारत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था। यह फैसला क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना गया था।
जयराम रमेश का कहना है कि वर्ष 2014 के बाद चाबहार परियोजना को प्रधानमंत्री के विजन के रूप में प्रस्तुत किया गया। उस समय इसे भारत की विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि बताया गया था। हालांकि, अब हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि परियोजना की स्थिति को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
उठे सवाल
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में चाबहार परियोजना के लिए कोई अलग से राशि क्यों नहीं रखी गई। पार्टी का कहना है कि इससे यह संदेह पैदा होता है कि क्या भारत इस परियोजना से पीछे हट रहा है या फिर पहले किए गए निवेश को ही अंतिम मान लिया गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, इसलिए इस परियोजना के भविष्य को लेकर सरकार को देश के सामने साफ तस्वीर पेश करनी चाहिए।
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