Puri Jagannath Temple : ओडिशा के पुरी में स्थित विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ के श्रीमंदिर के निर्माण इतिहास को लेकर एक नई और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। हालिया शोध में दावा किया गया है कि इस भव्य मंदिर के पहले निर्माता कोई राजा नहीं, बल्कि ‘पल्ल’ नामक एक कुशल शिल्पी थे। यह खोज अब तक प्रचलित ऐतिहासिक मान्यताओं को चुनौती देती है और मंदिर निर्माण की पारंपरिक समझ को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तथ्य एक प्राचीन शिलालेख के अध्ययन से सामने आया है, जो नृसिंह मंदिर परिसर के आसपास पाया गया था। इस शिलालेख की शुरुआती पंक्तियों में संस्कृत भाषा में ‘नव पुरुषोत्तम निलय’ यानी श्रीमंदिर के निर्माण में ‘कुलपुत्र पल्ल’ की अहम भूमिका का उल्लेख मिलता है।
Puri Jagannath Temple के इतिहास में नया मोड़
अभिलेख में पल्ल को कर्मकार कुल से जुड़ा बताया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह एक उच्च स्तरीय शिल्पी और वास्तुकार रहे होंगे। अब तक आम धारणा यह रही है कि 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंगभीम देव तृतीय ने वर्तमान श्रीमंदिर का निर्माण करवाया था। हालांकि, नया शोध इस विचार को नया रूप देता है। शोध के अनुसार, भले ही राजकीय संरक्षण मौजूद रहा हो, लेकिन मंदिर की वास्तविक योजना, निर्माण की रूपरेखा और शिल्पकला का श्रेय शिल्पी पल्ल को दिया जाना चाहिए। यह तथ्य उस दौर के शिल्पकारों की भूमिका को उजागर करता है, जिन्हें इतिहास में अक्सर अनदेखा किया गया।
शिल्प परंपरा और कर्मकार समाज
शोधकर्ता दीपक कुमार नायक के मुताबिक, यह शिलालेख केवल मंदिर के निर्माण इतिहास को ही नहीं, बल्कि उस समय की शिल्प परंपरा और कर्मकार समाज की स्थिति को भी समझने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में मंदिर निर्माण केवल राजाओं का कार्य नहीं था, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कुशल शिल्प परंपराओं का परिणाम होता था। दुर्भाग्यवश, इन कारीगरों और वास्तुकारों के नाम इतिहास में अक्सर दबकर रह गए।
इतिहास के पुनर्मूल्यांकन की जरूरत
इतिहासकारों का मानना है कि यह खोज ओडिशा की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को समझने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि श्रीमंदिर जैसे भव्य और पवित्र स्थल के निर्माण में स्थानीय शिल्प परंपरा और कर्मकार समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अन्य अभिलेखों और ताम्रपत्रों का भी गहन अध्ययन किया जाए, तो श्रीमंदिर के इतिहास से जुड़े और कई अनजाने तथ्य सामने आ सकते हैं।
गुमनाम शिल्पियों को मिला सम्मान
शिल्पी पल्ल का नाम सामने आना श्रीजगन्नाथ मंदिर के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है। यह खोज उन गुमनाम कारीगरों और शिल्पियों को सम्मान दिलाने का अवसर भी है, जिनकी कला और मेहनत आज भी आस्था और संस्कृति का आधार बनी हुई है। हालांकि, इस शोध को मंदिर प्रशासन, भक्तों और अन्य इतिहासकारों द्वारा किस रूप में स्वीकार किया जाएगा, यह आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।
Read More : Golden Temple के सरोवर में कुल्ला करने वाला युवक गाजियाबाद से गिरफ्तार, वीडियो जारी कर मांगी माफी





