Ration Card : सरकारी राशन की दुकानों पर मिलने वाला सस्ता अनाज जिनके लिए जीवनरेखा है, वही राशन वर्षों से ऐसे लोग भी उठा रहे थे जिनके घरों में महंगी कारें खड़ी हैं और आलीशान बंगले खड़े हैं। उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जांच में यही चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा योजना के तहत जारी सफेद राशन कार्डों की जांच में बड़ी संख्या में अपात्र परिवार पकड़े गए हैं।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निरीक्षक सुनील देवली के नेतृत्व में विभागीय टीम ने ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र के साथ-साथ श्यामपुर, रायवाला, छिद्दरवाला और आसपास के इलाकों में घर-घर सत्यापन कराया।
Ration Card
इस दौरान राशन विक्रेताओं की मदद से कार्डधारकों की पारिवारिक आय, रहन-सहन और आर्थिक स्थिति की जानकारी जुटाई गई। साथ ही यह भी देखा गया कि कौन से कार्ड लंबे समय से उपयोग में नहीं थे। जांच के बाद जो सूची सामने आई, उसने विभाग को भी हैरान कर दिया। कुल 2567 राशन कार्ड ऐसे पाए गए, जो नियमों के हिसाब से पूरी तरह अपात्र थे। इनमें कई कार्ड डुप्लीकेट थे, तो कई ऐसे परिवारों के नाम थे जिनकी आय तय सीमा से कहीं अधिक थी। जांच की खबर फैलते ही अपात्र कार्डधारकों में हड़कंप मच गया।
पहचान पत्र बना लिया था राशन कार्ड
विभाग के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग सफेद राशन कार्ड को सिर्फ पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इनमें से करीब 40 प्रतिशत से ज्यादा लोग नियमित रूप से सरकारी राशन भी उठा रहे थे। यानी जरूरतमंदों के हिस्से का अनाज सीधे अपात्र लोगों के घर पहुंच रहा था। राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत जरूरतमंद परिवारों को दो वक्त का भोजन सुनिश्चित किया जाता है। इस योजना में प्रत्येक सदस्य को प्रति माह पांच किलो राशन मिलता है। नियम के अनुसार जिन परिवारों की वार्षिक आय 15 हजार रुपये से अधिक है, वे इस योजना के पात्र नहीं हैं।
अब असली जरूरतमंदों को मौका
अपात्र सफेद कार्ड निरस्त होने के बाद विभाग ने खाली हुई यूनिटों में वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को शामिल करना शुरू कर दिया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत दिव्यांग, मानसिक रूप से अस्वस्थ, निराश्रित वृद्धजन, विधवाएं और अत्यंत गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का कहना है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा। समय-समय पर ऐसे सत्यापन अभियान चलाए जाएंगे ताकि कोई भी संपन्न परिवार गलत तरीके से गरीबों का हक न छीन सके।
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