8th Pay Commission : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अहम माने जा रहे आठवां वेतन आयोग ने अब औपचारिक रूप से काम तेज कर दिया है। 24 अप्रैल 2026 को देहरादून में इसकी पहली बैठक हुई, जहां विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ आमने-सामने चर्चा की गई। यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं रही, बल्कि इसमें कर्मचारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
पहली बैठक के बाद अब 28 अप्रैल से दिल्ली में दूसरी चरण की चर्चा शुरू हो चुकी है, जो 30 अप्रैल तक चलेगी। इस बैठक में नेशनल काउंसिल (JCM) समेत कई बड़े कर्मचारी संगठन शामिल हो रहे हैं।
8th Pay Commission
यहां संगठनों को अपनी मांगें सीधे आयोग के सामने रखने का मौका दिया जा रहा है, जिससे निर्णय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके। डॉ. मंजीत पटेल के मुताबिक, देहरादून में हुई बैठक का माहौल काफी सकारात्मक रहा। आयोग ने 20 से अधिक संगठनों को अलग-अलग समय देकर उनकी बात सुनी। इस ‘वन-टू-वन’ बातचीत के तरीके से कर्मचारियों को अपनी समस्याएं खुलकर रखने का मौका मिला और आयोग ने भी उन्हें गंभीरता से सुना।
फैमिली यूनिट बदलने की बड़ी मांग
बैठक में सबसे अहम मुद्दा सैलरी तय करने के आधार को लेकर उठा। कर्मचारियों ने मौजूदा 3 सदस्यीय फैमिली यूनिट को बढ़ाकर 5 करने की मांग रखी। उनका तर्क है कि महंगाई और पारिवारिक जरूरतों को देखते हुए यह बदलाव जरूरी है। इसके अलावा सोशल ऑब्लिगेशन लीव और पैरेंट केयर लीव जैसी नई छुट्टियों को भी शामिल करने की मांग की गई। कर्मचारी संगठनों ने लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक सैलरी 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि अगर फैमिली यूनिट का दायरा बढ़ाया जाता है, तो वेतन संरचना में स्वतः सुधार होगा। इससे निचले स्तर के कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
फिटमेंट फैक्टर पर भी जोर
वेतन वृद्धि के लिए फिटमेंट फैक्टर को अहम माना जा रहा है। नेशनल काउंसिल (JCM) पहले ही 3.833 के फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दे चुकी है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि सही गणना के आधार पर यह 2.62 से 3.833 के बीच तय किया जा सकता है, जिससे सैलरी में बड़ा उछाल संभव है। बैठक में छुट्टियों को लेकर भी कई नए प्रस्ताव सामने आए हैं। कर्मचारियों ने 90 दिनों की विशेष छुट्टियों की मांग की है, जिसमें सोशल और फैमिली केयर लीव शामिल होंगी। इसके अलावा सालाना 14 कैजुअल लीव, 30 अर्न्ड लीव और 20 मेडिकल लीव को एक समान करने की बात भी रखी गई है। खास बात यह है कि छोटी मेडिकल लीव के लिए सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म करने की भी मांग उठी है।
इन बैठकों के बाद अब कर्मचारियों की नजर आयोग के अगले कदम पर है। जिस तरह से सुझावों को सुना जा रहा है, उससे उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार वेतन, भत्तों और सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले महीनों में आयोग की सिफारिशें लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भविष्य को प्रभावित करेंगी।
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