UP Nuclear Power Project : उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली की जरूरत को देखते हुए राज्य सरकार और केंद्र सरकार बड़े स्तर पर परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। प्रस्तावित योजना के तहत प्रदेश में छह नए न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित किए जा सकते हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राज्य की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है और भविष्य की बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित छह परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की कुल क्षमता लगभग 8400 मेगावाट होगी। यह उत्पादन क्षमता प्रदेश की मौजूदा बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ औद्योगिक विकास और शहरीकरण की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
UP में लगेंगे 6 नए न्यूक्लियर पावर प्लांट
उत्तर प्रदेश में फिलहाल परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अलग से कोई व्यापक नीति मौजूद नहीं है। इसी वजह से सरकार नई न्यूक्लियर पावर पॉलिसी तैयार करने में जुटी हुई है। नीति का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, जिसे अंतिम रूप देकर कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। इसके बाद परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है। प्रस्तावित परियोजनाओं के तहत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को शामिल किया गया है। शुरुआती योजना के मुताबिक तीन परियोजनाएं पूर्वांचल क्षेत्र में विकसित की जा सकती हैं, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड को एक-एक परियोजना मिलने की संभावना है। एक अन्य परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश अभी जारी है।
NTPC ने दिखाई सबसे ज्यादा रुचि
जानकारी के अनुसार नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन ने कई संभावित स्थलों के लिए प्रस्ताव तैयार किए हैं। प्रयागराज, ललितपुर और सोनभद्र जैसे जिलों में परियोजनाएं विकसित करने की संभावनाओं पर काम चल रहा है। इन स्थलों का प्रारंभिक तकनीकी और भौगोलिक मूल्यांकन भी किया जा चुका है। दूसरी ओर अन्य कंपनियां भी अपने स्तर पर संभावित स्थानों का अध्ययन कर रही हैं। परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं सामान्य बिजली संयंत्रों की तुलना में अधिक जटिल मानी जाती हैं। इनके लिए पर्यावरणीय, तकनीकी और सुरक्षा संबंधी कई मंजूरियां लेनी पड़ती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सभी स्वीकृतियां मिलने के बाद किसी भी न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण और संचालन में सात से नौ वर्ष तक का समय लग सकता है।
लगातार बढ़ रही बिजली मांग
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। मौजूदा समय में प्रदेश की मांग लगभग 32 हजार मेगावाट के आसपास पहुंच चुकी है। आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा 40 से 45 हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में वैकल्पिक और स्थायी ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है न्यूक्लियर ऊर्जा?
विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का प्रभावी विकल्प बन सकती है। न्यूक्लियर पावर प्लांट चौबीसों घंटे बिजली उत्पादन करने में सक्षम होते हैं और इनसे कार्बन उत्सर्जन भी बेहद कम होता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश स्वच्छ ऊर्जा के रूप में परमाणु ऊर्जा पर जोर दे रहे हैं।
नरौरा प्रदेश का एकमात्र परमाणु केंद्र
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर जिले का नरौरा परमाणु ऊर्जा केंद्र ही एकमात्र सक्रिय न्यूक्लियर पावर प्लांट है। यह वर्षों से बिजली उत्पादन कर रहा है और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों को ऊर्जा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रस्तावित नई परियोजनाओं के बाद राज्य की परमाणु ऊर्जा क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।
यदि सभी प्रस्तावित परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा केंद्रों वाले राज्यों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल बिजली संकट कम होगा, बल्कि उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है। आने वाले समय में यह योजना प्रदेश के ऊर्जा ढांचे को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।
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