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मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी, क्या है इसका महत्व? जाने उसके पीछे की पौराणिक कथा

Makar Sankranti:- मकर संक्रांति का त्यौहार हर साल बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं जिसकी वजह से इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं की मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों बनाई जाती है और इसके पीछे की वजह क्या है? आज हम आपको उसके पीछे की वजह बताएंगे और इसके पीछे क्या पौराणिक कहानी है। इसके बारे में विस्तार से बताएंगे।

खिचड़ी से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, मकर संक्रांति पर खिचड़ी इसीलिए बनाई जाती है, क्योंकि यह परंपरा बाबा गोरखनाथ से जुड़ी हुई है। कहां जाता है एक समय खिलजी के आक्रमण के समय युद्ध में भाग लेने वाले सभी योद्धाओं और योगियो को अक्सर भूखा रहना पड़ता था। इसके बाद उनका शरीर कमजोर होने लगा और शक्ति कम होने लगी। तब बाबा गोरखनाथ में उनका दाल और चावल के साथ सब्जियों को मिलाकर आसानी से तैयार होने वाले व्यंजन के बारे में सलाह दी और इस व्यंजन को नाम दिया खिचड़ी।

मकर संक्रांति पर उड़द दाल खिचड़ी का महत्व

हर साल मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाई जाती है। ऐसा भी कहा जाता है की खिचड़ी खाने से ग्रहों के शुभ प्रभाव शरीर और जीवन पर देखने को मिलते हैं। इस दिन सूर्य देव शनि देव के घर जाते हैं इसीलिए शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उड़द दाल की खिचड़ी बनाई जाती है। यह एक बहुत ही पुरानी मान्यता है।

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