GST Rules : आगरा उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल (महानगर) ने जीएसटी व्यवस्था में व्याप्त समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की है। संगठन के पदाधिकारियों ने सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम संबोधित मांगपत्र जीएसटी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त (ग्रेड-1) पंकज गांधी को सौंपा। व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई नियमों की अलग-अलग व्याख्या की जा रही है, जिससे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
महानगर अध्यक्ष नरेश पांडेय और कोषाध्यक्ष सुरेश लवानिया के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कई मामलों में जीएसटी अधिकारी तकनीकी या मानवीय त्रुटियों को आधार बनाकर कार्रवाई कर रहे हैं।
GST नियमों पर भड़के व्यापारी
व्यापारियों का कहना है कि इससे न केवल उत्पीड़न बढ़ रहा है बल्कि भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने मांग की कि जिन मामलों में पूरा टैक्स जमा हो चुका हो, वहां वाहनों को रोककर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया तत्काल बंद की जाए। व्यापारियों ने 40 लाख रुपये से कम वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारियों को अनिवार्य जीएसटी पंजीकरण से राहत देने की मांग की। इसके साथ ही एसआईबी जांच और सर्वे के दौरान दबाव बनाकर टैक्स वसूली जैसी शिकायतों पर भी रोक लगाने की मांग उठाई गई। उनका कहना है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
विसंगतियां दूर करने की मांग
ज्ञापन में तैयार माल और कच्चे माल पर अलग-अलग जीएसटी दरों से होने वाली दिक्कतों का भी मुद्दा उठाया गया। व्यापारियों ने उदाहरण देते हुए कहा कि कागज पर 18 प्रतिशत और कार्डबोर्ड पर 5 प्रतिशत जीएसटी होने से उद्योग प्रभावित होता है। इसी तरह तंबाकू और तंबाकू पत्ते पर कर की अलग-अलग दरों को भी समाप्त करने की मांग की गई। व्यापार मंडल ने पंजीकृत व्यापारियों के लिए 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा लागू करने, निशुल्क लैपटॉप और जीएसटी सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। इसके अलावा विलंब से कर भुगतान पर ब्याज दर 18 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत करने और दंडात्मक प्रावधानों में जेल की सजा समाप्त कर केवल आर्थिक दंड रखने का सुझाव दिया गया।
सुधार की भी मांग
व्यापारियों ने आयकर की तर्ज पर जीएसटी रिफंड सीधे बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था लागू करने और देरी होने पर 18 प्रतिशत ब्याज देने की मांग की। साथ ही ट्रांसपोर्टर द्वारा ट्रक बदलने पर ई-वे बिल-2 बनने की स्थिति में उसे डबल सेल मानकर टैक्स लगाने की व्यवस्था खत्म करने और पैकिंग मैटेरियल पर अधिक जीएसटी दर के कारण बनने वाले अंतर की राशि सीधे व्यापारी के खाते में भेजने की भी मांग की गई।
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