Kanpur Dehat Wheat Procurement 2026 : कानपुर देहात में इस वर्ष गेहूं खरीद का पूरा सीजन किसानों के लिए काफी सकारात्मक रहा। शासन की ओर से लागू की गई सरल प्रक्रिया और बेहतर व्यवस्थाओं का असर सीधे क्रय केंद्रों पर दिखाई दिया। किसानों को अपनी उपज बेचने में पहले की तुलना में कम दिक्कतों का सामना करना पड़ा और पूरे जिले में खरीद प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रही। प्रशासन ने इस बार किसान हितों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी। जिले में इस वर्ष गेहूं खरीद के लिए लगभग 37,500 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, इस लक्ष्य के सापेक्ष करीब 77 प्रतिशत खरीद पूरी कर ली गई। इस दौरान कुल 5,326 किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचा। यह आंकड़ा बताता है कि सरकारी व्यवस्था पर किसानों का भरोसा बढ़ा है और उन्होंने बड़े पैमाने पर इसका लाभ उठाया है।
Kanpur Dehat Wheat Procurement 2026
पूरे जनपद में विभिन्न स्थानों पर क्रय केंद्र स्थापित किए गए थे ताकि किसानों को दूर न जाना पड़े। इन केंद्रों पर तौल, भंडारण और अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की गई थीं। जिला प्रशासन ने लगातार निगरानी रखी ताकि किसी भी केंद्र पर अव्यवस्था न हो। किसानों को समय पर टोकन और उचित व्यवस्था मिलने से खरीद प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज और पारदर्शी बनी रही। इस वर्ष किसानों को सबसे बड़ी राहत सत्यापन प्रक्रिया में मिली। पहले जहां दस्तावेजों के सत्यापन के लिए तहसीलों और दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं इस बार प्रक्रिया को सरल कर दिया गया। किसान सीधे क्रय केंद्र पर पहुंचकर अपनी उपज बेच सके। इस बदलाव से समय की बचत हुई और किसानों की परेशानी काफी हद तक कम हो गई।
भुगतान और निगरानी व्यवस्था
खरीद के दौरान भुगतान व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से संचालित किया गया। किसानों को उनकी उपज का मूल्य समय पर उपलब्ध कराने के लिए नियमित निगरानी रखी गई। जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि पूरे अभियान के दौरान व्यवस्था पर लगातार नजर रखी गई ताकि किसी भी स्तर पर देरी या शिकायत न हो। अभियान को 15 जून को समाप्त कर दिया गया। इस बार की खरीद प्रक्रिया में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और सरकारी समर्थन मूल्य का लाभ उठाया। सरल प्रक्रिया, बेहतर व्यवस्थाएं और समय पर भुगतान ने किसानों का भरोसा मजबूत किया है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यदि इसी तरह व्यवस्था बनी रही तो सरकारी खरीद और अधिक प्रभावी होगी और किसान अधिक लाभान्वित होंगे।
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