Home » धर्म » आखिर क्या है शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा? जाने कैसे महादेव की कृपा मिलेगी जीवन में दरिद्रता से मुक्ति

आखिर क्या है शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा? जाने कैसे महादेव की कृपा मिलेगी जीवन में दरिद्रता से मुक्ति

Shukra Pradosh Vrat:- शुक्र प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ही खास महत्व है। शुक्र प्रदोष व्रत को भगवान शिव को समर्पित किया गया है। यह व्रत अगर आप रखते हैं तो इससे महादेव की कृपा मिलती है सुख, सौभाग्य और रुका हुआ धन सब कुछ वापस मिलने लग जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो आपको जरूर जानी चाहिए। आइए इससे जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में जानते हैं।

शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा क्या है?

शुक्र प्रदोष व्रत की एक पौराणिक कथा है। इस कथा के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मणी रहा करती थी। जिसके पति का स्वर्गवास हो चुका था और वह अपने बेटे के साथ बिल्कुल अकेली थी इसलिए वह रोजाना सुबह अपने पुत्र को लेकर भिक्षा मांगने चली जाती थी लेकिन इस भिक्षा के द्वारा अपने पुत्र का पेट पालती थी और खुद भूखी रहती थी। ऐसे ही समय बिता गया और एक दिन भिक्षा मांग कर लौटते हुए उन्हें नदी के किनारे एक बालक जो की अत्यंत सुंदर और आकर्षक नजर आ रहा था वह उदास बैठा नजर आया।

यह बालक विदर्भ देश का राजकुमार था जिसके पिता को शत्रुओं ने युद्ध में मारकर पूरा राज्य अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद ब्राह्मणी को यह सब देखते हुए उस मासूम बालक पर दया आ गई जिसके बाद वह उस बालक को अपने घर ले आई। कुछ समय बाद यह ब्राह्मणी राजकुमार और अपने पुत्र को लेकर शांडिल्य ऋषि के आश्रम पहुंची। इसके बाद इन्होंने ऋषि से प्रदोष व्रत की महिमा जानी और ब्राह्मणी और उसके दोनों बालकों ने यह व्रत रखा।

इसके बाद महादेव की कृपा से राजकुमार की एक गंधर्व कन्या से भेंट हुई और कन्या के पिता ने यह जानकर की है यह एक राजकुमार है राजकुमारी की शादी इस राजकुमार से कर दी और इस राजा की सेना लेकर राजकुमार ने शत्रु पर आक्रमण कर अपना राज्य वापस ले लिया। इसके बाद राजकुमार ने अपने राज्य में ब्राह्मणी के पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया और ब्राह्मणी के सारे कष्टों का निवारण कर दिया। इस प्रकार महादेव की कृपा से उनकी दरिद्रता दूर हो गई और वह सुखी जीवन जीने लगे।

प्रदोष व्रत की पूजा का महत्व

प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है। अगर आप सूर्यास्त के समय जब दिन और रात का मिलन होता है उस समय काल को प्रदोष व्रत कहते है इस समय भगवान शिव की पूजा करते हैं तो यह बहुत ही फलदाई होता है। भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस दौरान अगर आप शुक्रवार के दिन दूध, दही, चावल का दान करते हैं तो यह बेहद शुभ माना जाता है।

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