Weird News : दुनिया में रोज ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जो अपनी अनोखी वजह या अजीबोगरीब तरीके के कारण लोगों का ध्यान खींच लेती हैं। अमेरिका में एक गांव ऐसा है, जहां सिर्फ एक महिला रहती है और वही वहां की मेयर से लेकर बार संचालक तक की जिम्मेदारी संभालती है। वहीं कनाडा में एक मां ने अपने बोल न पाने वाले बेटे से बातचीत आसान बनाने के लिए हाथ पर ही कीबोर्ड का टैटू बनवा लिया। इसके अलावा अफगानिस्तान में युद्ध के बाद बचे बम के खोलों का इस्तेमाल लोग रोजमर्रा की चीजों के लिए कर रहे हैं।
अमेरिका के नेब्रास्का राज्य का मोनौवी गांव अपनी आबादी को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा में रहा है। यहां रहने वाली एकमात्र महिला एल्सी आइलर ही गांव की पूरी व्यवस्था संभालती हैं। वह मेयर के साथ टाउन क्लर्क, ट्रेजरर और सेक्रेटरी की जिम्मेदारी भी निभाती हैं। पति रूडी की मौत के बाद वह 2003 से गांव की अकेली निवासी हैं।
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एल्सी 1971 से गांव में बार चला रही हैं, जहां आसपास के इलाकों से लोग खाना और पेय लेने पहुंचते हैं। वह हर साल शराब का लाइसेंस भी खुद जारी करती हैं और उस पर खुद ही हस्ताक्षर करती हैं। उन्होंने अपने पति की करीब 5 हजार किताबों से गांव में एक लाइब्रेरी भी शुरू की। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार मोनौवी दुनिया का सबसे कम आबादी वाला इनकॉरपोरेटेड टाउन है। कनाडा में जेसिका फनेचर नाम की महिला ने अपने 11 वर्षीय बेटे हंटर के लिए अनोखा तरीका अपनाया। हंटर बोल नहीं सकता और बातचीत के लिए कम्युनिकेशन टैबलेट का इस्तेमाल करता है। एक दिन खाना खाते समय टैबलेट की बैटरी खत्म हो गई। इसके बाद हंटर ने नैपकिन पर कीबोर्ड बनाकर अक्षरों की ओर इशारा करते हुए अपनी बात समझाई।
हाथ बना बातचीत का जरिया
बेटे का यह तरीका जेसिका को इतना पसंद आया कि उन्होंने अपने हाथ पर ही कीबोर्ड का टैटू बनवा लिया। इसमें अंग्रेजी अक्षरों के साथ खुशी, दुख और ‘लव यू’ जैसे भावों के संकेत भी शामिल हैं। अब हंटर बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के अपनी मां से बातचीत कर सकता है। टैटू देखने के बाद हंटर ने सबसे पहले अपनी मां के हाथ पर ‘Mama’ लिखा। बाद में उसके दोस्तों के लिए कीबोर्ड वाली शर्ट भी तैयार की गई।
अफगानिस्तान में बम के खोल बने डस्टबिन
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में दशकों तक चले युद्ध के निशान आज भी कई जगह दिखाई देते हैं। यहां खाली बम के खोलों का इस्तेमाल लोग डस्टबिन, गमले और दूसरी घरेलू जरूरतों के लिए कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सड़कों के किनारे ऐसे कई सैन्य खोल दिखाई दिए, जिनका इस्तेमाल लोग कचरा जमा करने के लिए कर रहे थे।
एक ट्रैवल ब्लॉगर ने काबुल में ऐसे कई बम के खाली खोल देखे, जिनमें कचरा डाला जा रहा था। कुछ में पौधे लगाए गए थे, जबकि कुछ को सामान रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। दशकों के युद्ध के बाद बड़ी संख्या में बम, रॉकेट और सैन्य उपकरणों के खाली खोल अलग-अलग जगहों पर रह गए। मजबूत धातु और बड़े आकार के कारण लोग इन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल कर लेते हैं।
सामने आईं अनोखी तस्वीरें
इन घटनाओं की खास बात यह है कि तीनों जगहों पर बेहद अलग परिस्थितियों में लोगों ने अपनी जरूरत के हिसाब से अनोखे तरीके अपनाए। कहीं एक महिला पूरा गांव चला रही है, कहीं तकनीकी समस्या का समाधान टैटू बनाकर निकाला गया और कहीं युद्ध की विरासत रोजमर्रा के सामान में बदल गई। यही वजह है कि इन घटनाओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
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