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Bareilly में आज से उर्स-ए-रजवी की शुरुआत, परचम कुशाई से होगा आगाज; लाखों जायरीन के स्वागत को तैयार शहर

Bareilly News : बरेली में उर्स-ए-रजवी का आगाज गुरुवार को धार्मिक परंपराओं के बीच होगा। शाम छह बजे इस्लामिया कॉलेज मैदान में परचम कुशाई की रस्म अदा की जाएगी। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी इस रस्म को अंजाम देंगे। इससे पहले सुबह कुरआन ख्वानी होगी, जबकि दोपहर में आजम नगर से परचमी जुलूस निकलेगा, जो तय मार्गों से गुजरते हुए उर्स स्थल तक पहुंचेगा।

उर्स के पहले दिन रात नौ बजे से अंतरराष्ट्रीय नातिया मुशायरे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश से आए शायर और नातख्वां अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके बाद निर्धारित समय पर कुल शरीफ की रस्म अदा होगी। उर्स के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला लगातार जारी रहेगा और बड़ी संख्या में जायरीन इसमें शामिल होंगे।

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बारिश के कारण उर्स स्थल पर बने कीचड़ को देखते हुए प्रशासन ने इस्लामिया कॉलेज गेट से मुख्य मंच तक अस्थायी सड़क तैयार कराई है, ताकि आने-जाने में किसी को परेशानी न हो। नगर निगम ने सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था को भी दुरुस्त किया है। अस्थायी शौचालय, हैंडपंप और पानी के टैंकों की व्यवस्था की गई है, जबकि कर्मचारियों की अलग-अलग शिफ्टों में ड्यूटी लगाकर व्यवस्थाओं की निगरानी की जाएगी।

शहरभर में मेहमाननवाजी

उर्स में आने वाले जायरीन के स्वागत के लिए शहर के कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। ठहरने, लंगर और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। आठ अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भी कुल और धार्मिक आयोजनों का कार्यक्रम तय किया गया है। स्वयंसेवकों को जायरीन की सहायता और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। खानकाह ताजुश्शरिया, जमीयतुर्रजा और बैतुर्रजा में भी तीन दिनों तक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कुरआन ख्वानी, नात-ओ-मनकबत, तकरीरें, जलसे और कुल शरीफ की रस्में निर्धारित समय के अनुसार होंगी। जायरीन की मदद के लिए हेल्पलाइन सेवा 24 घंटे सक्रिय रहेगी और जरूरत पड़ने पर व्हाट्सएप के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही मेडिकल कैंप भी लगाया जाएगा, जहां स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा।

सामाजिक और धार्मिक संदेशों पर जोर

उर्स के आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि मंच का उपयोग किसी भी तरह की राजनीतिक तकरीरों के लिए नहीं होगा। उलमा धार्मिक, सामाजिक और नैतिक विषयों पर अपने विचार रखेंगे। साथ ही शिक्षा, समाज में सौहार्द, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और समुदाय से जुड़े अहम मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि उर्स का संदेश अमन, भाईचारे और इंसानियत तक पहुंचे।

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