UP Politics : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति को लेकर स्पष्ट संकेत देना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण पटेल ने कहा कि पार्टी इस बार पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। यदि राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन करना भी पड़ा, तो कांग्रेस आधे से कम सीटों पर समझौता नहीं करेगी। उन्होंने यह बात शनिवार को प्रयागराज स्थित कमला नेहरू भवन में आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान कही। बैठक में भाजपा पर हमला बोलते हुए सत्यनारायण पटेल ने कहा कि कांग्रेस की भगवान राम में अटूट आस्था है, लेकिन भाजपा धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाकर सत्ता में बने रहने की कोशिश करती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति आस्था का सम्मान करने वाली है, जबकि भाजपा धर्म को चुनावी मुद्दा बनाती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता के बीच जाकर पार्टी की विचारधारा और नीतियों को मजबूती से पहुंचाना होगा।
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कांग्रेस नेता ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए सबसे बड़ी जरूरत मजबूत संगठन की है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और नए लोगों को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व संगठन सृजन अभियान को लेकर गंभीर है और आने वाले समय में ऐसी बैठकें जिला मुख्यालय के बजाय ब्लॉक स्तर पर भी आयोजित की जाएंगी, ताकि संगठन गांव-गांव तक मजबूत हो सके। बैठक में जिला कांग्रेस अध्यक्ष चेतनारायण सिंह ने कहा कि किसी भी चुनाव में मजबूत संगठन ही सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने की अपील की। उनका कहना था कि यदि संगठन मजबूत होगा तो चुनावी परिणाम भी पार्टी के पक्ष में आएंगे।
बढ़ी सियासी हलचल
विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों दल अपने-अपने सार्वजनिक बयानों के जरिए राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है और करीब 150 या उससे अधिक सीटों पर दावा जता रही है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी का रुख यह है कि सीटों का बंटवारा केवल उन क्षेत्रों में होना चाहिए, जहां जीत की वास्तविक संभावना हो।
तस्वीर साफ नहीं
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले दोनों दल अपनी-अपनी सौदेबाजी की स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। कांग्रेस यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसके साथ गठबंधन होने पर विपक्षी वोटों का बेहतर ध्रुवीकरण संभव है। वहीं, समाजवादी पार्टी फिलहाल सीटों की संख्या पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।





