Agra News : आगरा में इन दिनों आध्यात्मिक आस्था और सेवा की अनूठी परंपरा देखने को मिल रही है। सद्गुरु स्वामी टेंऊंराम महाराज के 140वें जन्मोत्सव के अवसर पर शहर के चारों प्रेम प्रकाश आश्रमों में विशेष धार्मिक आयोजन चल रहे हैं। यह उत्सव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि संयम, सादगी और सेवा के संदेश को भी जीवंत रूप से प्रस्तुत कर रहा है। 9 जून से शुरू हुआ यह आयोजन 19 जुलाई को मुख्य समारोह के साथ संपन्न होगा। जन्मोत्सव के दौरान पूरे 40 दिनों तक श्रद्धालु विशेष नियमों का पालन करते हैं।
इस अवधि में सुबह और शाम सद्गुरु टेंऊंराम महाराज को ढोढा-चटनी का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु प्रतिदिन श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ का पाठ करते हैं और पूरे व्रतकाल में केवल एक समय भोजन ग्रहण करते हैं। यह परंपरा वर्षों से लगातार निभाई जा रही है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं।
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आगरा के काला महल, केदार नगर, कमला नगर-बोदला सहित सभी प्रेम प्रकाश आश्रमों में धार्मिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। केदार नगर स्थित साईं टेंऊंराम आश्रम की संचालिका भगवती के अनुसार, सद्गुरु को प्रिय ढोढा-चटनी का भोग प्रतिदिन पूरी श्रद्धा के साथ अर्पित किया जाता है। आश्रमों में सुबह से शाम तक भजन, सत्संग और ग्रंथ पाठ का वातावरण बना रहता है।
ढोढा-चटनी की परंपरा
आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, सिंध क्षेत्र में पहले ज्वार और बाजरे की मोटी रोटी को सिंधी भाषा में ‘ढोढा’ कहा जाता था। इसके साथ पुदीना और हरी मिर्च की चटनी परोसी जाती थी। यही साधारण भोजन सद्गुरु स्वामी टेंऊंराम महाराज को अत्यंत प्रिय था। वे अपने अनुयायियों और जरूरतमंदों को प्रेमपूर्वक यही प्रसाद खिलाते थे। उसी परंपरा को आज भी आश्रमों में पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। सिंधी सेंट्रल पंचायत के उपाध्यक्ष एवं सेवायत जगदीश बताते हैं कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अनुशासित जीवन और सेवा भावना का प्रतीक है। एक समय भोजन करने का नियम आत्मसंयम का संदेश देता है, जबकि ढोढा-चटनी का प्रसाद सादगी और समानता की भावना को मजबूत करता है। श्रद्धालु मानते हैं कि सद्गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही समाज में प्रेम, सेवा और भाईचारे की भावना को बढ़ाया जा सकता है।
19 जुलाई को होगा मुख्य समारोह
40 दिवसीय आयोजन का समापन 19 जुलाई को भव्य जन्मोत्सव समारोह के साथ होगा। इस अवसर पर विशेष सत्संग, भजन-कीर्तन, सामूहिक प्रार्थना और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों का कहना है कि इस परंपरा का उद्देश्य केवल धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी तक सद्गुरु स्वामी टेंऊंराम महाराज के प्रेम, सेवा और सादगी के संदेश को पहुंचाना भी है।
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