UNESCO World Heritage Site : दुनिया में कई ऐसी ऐतिहासिक जगहें हैं, जिनके बारे में जानकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. तुर्किए का डेरिनकुयू भी ऐसी ही अनोखी जगह है. यहां जमीन की सतह के नीचे एक पूरा शहर विकसित किया गया था. कभी यह जगह लोगों के रहने के साथ-साथ मुश्किल समय में सुरक्षित ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल होती थी. आज यह अपनी अनोखी बनावट और इतिहास के कारण दुनियाभर के लोगों का ध्यान खींचती है. डेरिनकुयू तुर्किए के कप्पाडोसिया क्षेत्र के नेवेशीर प्रांत में स्थित है. तुर्की भाषा में डेरिनकुयू का अर्थ ‘गहरा कुआं’ होता है.
इसकी सबसे खास बात यही है कि शहर का बड़ा हिस्सा जमीन के भीतर बनाया गया है. यह परिसर जमीन के नीचे करीब 280 फीट तक फैला हुआ है, जहां अलग-अलग स्तरों पर रहने और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी व्यवस्थाएं बनाई गई थीं.
UNESCO World Heritage Site
इस भूमिगत शहर की खोज 1960 के दशक में हुई थी. इसके निर्माण को लेकर इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के बीच अलग-अलग मत रहे हैं. माना जाता है कि इसकी शुरुआती संरचना प्राचीन काल में तैयार हुई थी और बाद के दौर में इसका विस्तार होता रहा. बीजान्टिन काल में इसका इस्तेमाल और विकास विशेष रूप से बढ़ा. लंबे समय तक चले संघर्षों के बीच स्थानीय ईसाई समुदाय ने इसे सुरक्षित शरणस्थली के रूप में विकसित किया. कप्पाडोसिया का इलाका अलग-अलग दौर में युद्ध और राजनीतिक संघर्षों का गवाह रहा है. ऐसे माहौल में जमीन के नीचे मौजूद यह शहर लोगों के लिए सुरक्षा कवच जैसा काम करता था.
बाहरी हमले के दौरान लोग यहां छिप सकते थे और लंबे समय तक सतह से दूर रह सकते थे. शहर के भीतर बनाई गई व्यवस्थाओं से पता चलता है कि इसे केवल छिपने की जगह के रूप में नहीं, बल्कि व्यवस्थित जीवन के लिए तैयार किया गया था.
कई जरूरी सुविधाएं
डेरिनकुयू की संरचना किसी सामान्य भूमिगत सुरंग जैसी नहीं थी. यहां रहने के कमरे, सामुदायिक स्थान, धार्मिक स्थल, स्कूल, खाद्य भंडारण के लिए जगह और अन्य जरूरी हिस्से बनाए गए थे. कुछ हिस्सों में पशुओं को रखने की व्यवस्था भी थी. करीब 4,000 वर्ग मीटर में फैले इस परिसर में एक समय अनुमान के मुताबिक 20 हजार तक लोग अपने पशुधन और खाद्य सामग्री के साथ रह सकते थे. जमीन के इतने नीचे शहर बनाना अपने आप में बड़ी चुनौती थी, लेकिन इसके निर्माताओं ने हवा और पानी की जरूरत का भी ध्यान रखा.
भूमिगत हिस्सों को वेंटिलेशन शाफ्ट से जोड़ा गया था, जिससे अलग-अलग स्तरों तक हवा पहुंच सके. कुओं और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं ने यहां रहने वाले लोगों के लिए जरूरी सुविधाओं को बनाए रखने में मदद की. यही तकनीकी व्यवस्था डेरिनकुयू को और भी खास बनाती है.
पत्थर के विशाल दरवाजे
शहर के भीतर सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया था. भूमिगत मार्गों में बड़े गोलाकार पत्थर के दरवाजे लगाए गए थे, जिन्हें जरूरत पड़ने पर रास्ता बंद करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था. इससे बाहरी लोगों के लिए अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था. कई सुरंगों और रास्तों ने भूमिगत परिसर के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ा हुआ था. डेरिनकुयू को साल 1985 में ‘गोरेमे नेशनल पार्क एंड द रॉक साइट्स ऑफ कप्पाडोसिया’ के हिस्से के रूप में UNESCO World Heritage List में शामिल किया गया. इसके ऐतिहासिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्व ने इसे विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. आज यहां आने वाले पर्यटक भूमिगत गलियारों और प्राचीन संरचनाओं को देखकर उस दौर की कल्पना कर सकते हैं.
बनाना क्यों था आसान?
डेरिनकुयू के निर्माण में वहां की प्राकृतिक भौगोलिक संरचना की भी बड़ी भूमिका रही. कप्पाडोसिया की जमीन ज्वालामुखीय राख से बनी नरम चट्टानों के लिए जानी जाती है. इन चट्टानों को काटना और आकार देना अपेक्षाकृत आसान था. इसी प्राकृतिक विशेषता का फायदा उठाकर लोगों ने जमीन के भीतर कमरे, गलियारे और दूसरी संरचनाएं तैयार कीं. यही वजह है कि आज हजारों साल बाद भी डेरिनकुयू दुनिया की सबसे दिलचस्प भूमिगत बस्तियों में गिना जाता है. फिर सोचना कैसा जल्दी से उठाईए मोबाइल और बुक करिए अपने परिवार संग इस अनोखे प्लेस को विजीट करने का टिकट… और हां आज के डिजिटल युग में अपने संग कैमरा ले जाना न भूले अन्यथा… आप अपने बिताए गए खास मूवमेंट को कैप्चर नहीं कर पाएंगे.









