Telangana Politics : बीजेपी ने राज्यों के संगठन में फेरबदल करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को तेलंगाना का प्रभारी बनाए रखा है। उनके साथ अभय पाटिल और राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा को सह-प्रभारी बनाया गया है। यह व्यवस्था ऐसे समय तय हुई है, जब पार्टी स्थानीय निकाय चुनावों के साथ अगले विधानसभा चुनाव के लिए संगठन मजबूत करने की तैयारी कर रही है। बंसल पश्चिम बंगाल के प्रभारी भी बने रहेंगे। सुनील बंसल के लिए तेलंगाना नया राजनीतिक मैदान नहीं है।
उन्हें अगस्त 2022 में राज्य का प्रभारी बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान संगठन की जिम्मेदारी संभाली। 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने आठ सीटें जीती थीं, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने राज्य की 17 में से आठ सीटों पर जीत दर्ज की।
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पिछले कुछ समय से तेलंगाना में बंसल और अभय पाटिल की भूमिकाओं को लेकर संगठनात्मक स्तर पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। पार्टी सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक बंसल संगठन से जुड़े मामलों को देखते थे, जबकि पाटिल राजनीतिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय थे। नई व्यवस्था में बंसल प्रभारी और अभय पाटिल व रेखा शर्मा सह-प्रभारी होंगे सुनील बंसल की पहचान बड़े मंचों और सार्वजनिक भाषणों के बजाय संगठन के भीतर काम करने वाले नेता के रूप में रही है।
वह बूथ मैनेजमेंट, कार्यकर्ताओं के नेटवर्क और चुनावी माइक्रो-प्लानिंग पर जोर देने के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन के बाद भी उनकी संगठनात्मक भूमिका चर्चा में रही।
राजस्थान से शुरू हुआ सफर
बंसल राजस्थान के कोटपुतली से आते हैं। छात्र राजनीति के दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 1989 में राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महासचिव चुने गए। इसके बाद वह आरएसएस के प्रचारक रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें उत्तर प्रदेश में बीजेपी के संगठनात्मक काम से जोड़ा गया, जहां उस समय अमित शाह पार्टी के प्रदेश प्रभारी थे। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद बंसल को उत्तर प्रदेश में संगठन की बड़ी जिम्मेदारी मिली। इसके बाद 2017, 2019 और 2022 के चुनावों के दौरान भी वह प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। उनके कार्यकाल में बूथ स्तर पर संगठन विस्तार और कार्यकर्ता नेटवर्क पर खास जोर दिया गया।
BJP के सामने चुनौतियां
तेलंगाना में बीजेपी ने पिछले कुछ चुनावों में अपना आधार बढ़ाया है, लेकिन राज्य की राजनीति में कांग्रेस और बीआरएस भी प्रमुख ताकतें हैं। ऐसे में बंसल के सामने पार्टी संगठन को अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत करने, स्थानीय नेतृत्व के बीच समन्वय बढ़ाने और विधानसभा चुनाव से पहले बूथ नेटवर्क को विस्तार देने जैसी चुनौतियां रहेंगी। 2024 में आठ लोकसभा सीटें जीतना बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण बढ़त थी। संगठनात्मक बदलाव में उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को दी गई है।
वहीं, बंसल को तेलंगाना के साथ पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी मिली है। इसलिए इसे केवल उत्तर प्रदेश से उनकी विदाई के रूप में देखने के बजाय बीजेपी की अलग-अलग राज्यों के लिए तय की गई नई संगठनात्मक व्यवस्था के संदर्भ में देखा जा सकता है।
अहम होगी बंसल की भूमिका
तेलंगाना का अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। इससे पहले स्थानीय निकाय चुनाव और संगठन विस्तार बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव होंगे। बंसल की नियुक्ति से इतना साफ है कि पार्टी ने राज्य में पुराने प्रभारी के साथ निरंतरता बनाए रखने का फैसला किया है। अब नजर इस बात पर होगी कि बंसल, अभय पाटिल और रेखा शर्मा की नई टीम तेलंगाना में बीजेपी के संगठन और चुनावी रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाती है।




