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Strait of Hormuz पर बढ़ा तनाव, शी चिनफिंग बोले- तुरंत खोला जाए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग

Strait of Hormuz
Strait of Hormuz

Strait of Hormuz : मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच शी चिनफिंग ने होर्मुज स्ट्रेट विवाद पर पहली बार खुलकर बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि इस अहम अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को तुरंत खोला जाना चाहिए। चीन का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब इस क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में गिना जाता है।

 Xi Jinping
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यह ओमान की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है। माना जाता है कि वैश्विक पेट्रोलियम कारोबार का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यहां कोई भी बाधा सीधे पूरी दुनिया को प्रभावित करती है।

Strait of Hormuz

चिनफिंग ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट सभी देशों के जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए और यहां मालवाही जहाजों का बिना किसी रुकावट के आवागमन होना जरूरी है। उनका कहना है कि यह सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक हित से जुड़ा मुद्दा है और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत इसका संचालन होना चाहिए। मौजूदा स्थिति में ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले कई जहाजों पर रोक लगा रखी है, वहीं अमेरिका की नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास घेराबंदी कर दी है। इस टकराव के कारण क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं और किसी भी समय हालात और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।

ईरानी टैंकर पर अमेरिका की कार्रवाई

हाल ही में अमेरिकी नौसेना ने चीन से लौट रहे एक ईरानी तेल टैंकर को रोककर अपने कब्जे में ले लिया। यह घटना ईरानी जलसीमा के करीब हुई, जिससे तनाव और बढ़ गया। इसके जवाब में ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन हमले किए हैं। इससे पहले भी ईरानी बलों द्वारा कुछ जहाजों को रोकने और फायरिंग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। चीन के राष्ट्रपति ने मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत कर इस मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलना क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों ही स्तर पर जरूरी है। साथ ही उन्होंने तुरंत युद्धविराम की अपील की और कहा कि बातचीत के जरिए ही स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।

ईंधन सप्लाई पर संकट

इस विवाद का असर भारत, चीन और अन्य देशों पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से ईंधन की कमी का खतरा बढ़ गया है। खास बात यह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ईरान के तेल का बड़ा हिस्सा चीन ही आयात कर रहा था, जिससे यह संकट और गंभीर हो गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी कार्रवाई पर चिंता जताई है। लगातार बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। अब दुनिया की नजर इस पर टिकी है कि क्या जल्द कोई समाधान निकलेगा या यह विवाद और गहराएगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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