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Congress की अहम बैठक से शशि थरूर गायब, सवालों का दौर शुरू; सियासी हलकों में बढ़ी हलचल

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Congress Leader Shashi Tharoor : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में शुक्रवार को कांग्रेस सांसदों की एक अहम बैठक हुई। संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई इस मीटिंग में लगभग सभी सांसद पहुंचे, लेकिन शशि थरूर का नाम एक बार फिर गायब रह। बता दें कि यह लगातार तीसरी बार है, जब उन्होंने इस तरह की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इसके बाद से ही पार्टी में अंदरूनी हलचल मची हुई है। सभी नेताओं के बीच बातचीत का दौर भी जारी है। इस क्षेत्र में महारथ हासिल कर चुके लोगों की राय भी लगातार सामने आ रही है। हालांकि, पार्टी द्वारा मामले में कोई भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

संसद का सत्र अभी जारी है और कांग्रेस आने वाले दिनों में सरकार पर और तीखे हमले करने की तैयारी में है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या थरूर और तिवारी जैसे चेहरे पार्टी लाइन के साथ तालमेल बैठाएंगे या यह खामोशी आगे जाकर बड़े विवाद का रूप लेगी। आइए विस्तार से जानते हैं पूरा मामल…

Congress की अंदरूनी राजनीति

कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर नजर रखने वाले लोग मानते हैं कि थरूर का बार-बार मीटिंग से नदारद रहना यूं ही नहीं है। दरअसल, उन्होंने पिछले कुछ समय में कई मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के फैसलों की सार्वजनिक सराहना की है। ऐसे में पार्टी और उनके बीच रिश्ते थोड़े खिंचे हुए हैं। बैठक संसद भवन की एनेक्सी एक्सटेंशन बिल्डिंग में आयोजित हुई। इसमें कांग्रेस की ओर से शीतकालीन सत्र के बाकी बचे दिनों की रणनीति पर चर्चा हुई कि कैसे सरकार को घेरा जाए, विपक्ष को एकजुट कैसे रखा जाए और किन मुद्दों पर दबाव बनाया जाए। ज्यादातर सांसद इस बैठक में शामिल थे, लेकिन थरूर की खाली कुर्सी ने फिर माहौल में नई गर्मी ला दी।

ये Congress के नेता भी रहे अनुपस्थित

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को शशि थरूर कोलकाता के एक कार्यक्रम में मौजूद थे। मीडिया सूत्रों की मानें तो इसी वजह से दिल्ली में आयोजित बैठक में वह पहुंच नहीं पाए। हालांकि, पार्टी ने उनकी अनुपस्थिति पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। थरूर के अलावा इस बैठक में चंडीगढ़ से सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी भी मीटिंग में उपस्थित नहीं थे। दो दिग्गज नेताओं की इस दूरी ने पार्टी के भीतर चल रही खामोश हलचलों को और हवा दे दी है।

पहले भी रही है ऐसी स्थिति

हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि थरूर ऐसी अहम बैठकों से दूर रहे हों। इससे पहले भी दो मौकों पर वह कांग्रेस की रणनीतिक बैठकों में शामिल नहीं हुए थे।
1 दिसंबर को उन्होंने खुद बयान जारी कर बताया था कि उन्होंने जानबूझकर बैठक नहीं छोड़ी थी। उस दिन वे केरल से लौटते समय फ्लाइट में थे और इसी वजह से मीटिंग में शामिल नहीं हो पाए। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रही बैठकों से दूरी बनाना अपने आप में एक संदेश है या तो असहमति है या फिर पार्टी के भीतर कुछ मुद्दों पर अलग राय है।

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