Sawan 2026 : काशी में बाबा विश्वनाथ के दरबार से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर एक ऐसा चमत्कारिक शिवलिंग स्थापित है जिसका आकार हर साल बढ़ता चला जाता है। हर वर्ष इस शिवलिंग का साइज एक तिल के बराबर बढ़ जाता है और मंदिर के पुजारियों को भी इस बदलाव का अहसास होता है। इसी वजह से इन्हें तिलभांडेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। काशी के केदार खंड में स्थापित इस मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता है कि यहां जलाभिषेक करने से नौ ग्रहों के दोष भी दूर हो जाते हैं।

जमीन से करीब 60 फीट ऊंचाई पर स्थित इस महाशिवलिंग के दर्शन के लिए भक्तों को 25 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ऐसा विशाल शिवलिंग काशी में कहीं और नहीं मिलता। इसका संबंध द्वापर युग से बताया जाता है।
Sawan 2026
कहा जाता है कि इसी स्थान पर ऋषि विभांडा ने कठोर तप किया था जिनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव यहां प्रकट हुए थे। इस मंदिर में देशभर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। वाराणसी में 12वीं सदी का यह प्राचीन शिवालय आज भी अपनी पुरानी भव्यता को समेटे हुए है। शहर के कंदवा क्षेत्र में स्थित कर्मदेश्वर महादेव मंदिर को चमत्कारिक शिव मंदिरों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते हैं। इस मंदिर की देखरेख संस्कृति विभाग के जिम्मे है और इसे मौजूदा काशी विश्वनाथ मंदिर से भी प्राचीन माना जाता है। बताया जाता है कि इसका निर्माण गढ़वाल के राजाओं ने कराया था।
महामृत्युंजय मंदिर
काशी में एक ऐसा प्राचीन मंदिर भी मौजूद है जहां दर्शन मात्र से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। दारानगर में स्थित महामृत्युंजय मंदिर में दर्शन करने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा जिनकी आयु कम होती है वे भी दीर्घायु की कामना लेकर यहां दर्शन और जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। इस प्राचीन मंदिर परिसर में एक कुआं भी है जिसका जल बेहद चमत्कारिक माना जाता है। मान्यता है कि इस जल के नियमित सेवन से रोगों से मुक्ति मिल जाती है।
गौरी केदारेश्वर
काशी के केदारखंड में गौरी केदारेश्वर का प्राचीन मंदिर भी स्थित है। यह लिंग भी स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है जो मकर संक्रांति पर खिचड़ी से प्रकट हुआ था। मान्यता है कि इस शिवलिंग के पूजन और जलाभिषेक से भैरवी यातना से भी मुक्ति मिल जाती है यानी मनुष्य सीधे मोक्ष को प्राप्त होता है। यहां दर्शन से उत्तराखंड के केदारनाथ के दर्शन के बराबर फल मिलने की मान्यता है। यह शिवलिंग 16 कलाओं से युक्त बताया जाता है और यहां दर्शन से हर मनोकामना पूरी होती है।
जागेश्वर महादेव
महादेव की नगरी में एक और चमत्कारिक शिवलिंग है जिसका आकार हर साल एक जौ के बराबर बढ़ता है। इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। काशी के औसानगंज में स्थित यह शिवालय जागेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है और यह शिवलिंग आकार में बाकी शिवलिंगों से काफी बड़ा है।
सारंगनाथ मंदिर
वाराणसी के सारनाथ में सारंगनाथ महादेव का प्राचीन मंदिर भी मौजूद है जहां एक ही अरघे में दो शिवलिंग स्थापित हैं। यहां भगवान शिव अपने साले के साथ विराजमान बताए जाते हैं। मान्यता है कि पूरे सावन महीने बाबा विश्वनाथ यहीं विराजते हैं इसलिए सावन में जो भी यहां जल अर्पित करता है उसे काशी विश्वनाथ के दर्शन के बराबर फल मिलता है।
पाताल में विराजते हैं पिता महेश्वर
इसके अलावा काशी में जमीन से नीचे यानी पाताललोक में पिता महेश्वर का मंदिर भी है। चौक की तंग गलियों में स्थित यह चमत्कारिक शिवलिंग जमीन से करीब 30 फीट नीचे विराजमान है। भक्त इस शिवलिंग के दर्शन दूर से ही करते हैं क्योंकि पूरे साल में सिर्फ एक ही दिन इस मंदिर को भक्तों के लिए खोला जाता है, हालांकि पुजारी हर दिन गुपचुप तरीके से यहां पूजा-आराधना करते रहते हैं।




