MCU Admission : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) की स्नातकोत्तर प्रवेश प्रक्रिया 2026-27 को लेकर विश्वविद्यालय के छात्र और NSUI के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता तनय शर्मा ने सवाल उठाए हैं। शर्मा ने एमए एमसी और एमए एपीआर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। उनका दावा है कि बेहतर अकादमिक रिकॉर्ड होने के बावजूद इंटरव्यू में उन्हें अपेक्षाकृत कम अंक मिले और शुरुआती चयन सूची में उनका नाम नहीं आया।
प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर दायर RTI के जवाब का हवाला देते हुए शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय ने इंटरव्यू की इवैल्युएशन शीट और स्कोर शीट संधारित नहीं होने की जानकारी दी है। उनका सवाल है कि यदि इंटरव्यू के आधार पर अभ्यर्थियों को अंक दिए गए थे, तो उन अंकों के निर्धारण का रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं है।
MCU Admission
तनय शर्मा के अनुसार, विश्वविद्यालय की ओर से जारी मेरिट और चयन सूची में अभ्यर्थियों के प्राप्तांक का उल्लेख नहीं किया गया है। उनका यह भी कहना है कि सूची पर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं। RTI के जवाब में इंटरव्यू पैनल के सदस्यों की जानकारी को कथित तौर पर ‘संवेदनशील विषय’ बताते हुए उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके अलावा इंटरव्यू की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग भी संधारित नहीं होने की जानकारी दी गई है। शर्मा का कहना है कि इन सभी बिंदुओं को साथ देखने पर प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता और मूल्यांकन के तरीके को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
APR में प्रवेश का दावा
तनय शर्मा ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया को लेकर शिकायतों के बाद चयन सूची जारी होने के पश्चात उन्हें एमए एपीआर में प्रवेश के लिए दस्तावेज सत्यापन संबंधी ई-मेल मिला। उनके मुताबिक, 14 अगस्त को दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनसे एक पूर्व-तैयार ‘माफीनामा’ पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। शर्मा का दावा है कि इस दस्तावेज में “कृपापूर्वक प्रवेश दिया जाए” जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
‘मेरा सवाल किसी व्यक्ति विशेष से नहीं’
तनय शर्मा ने कहा कि उनका सवाल किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर है। उनके मुताबिक, यदि इंटरव्यू के आधार पर अंक दिए गए हैं तो उनका मूल्यांकन रिकॉर्ड भी उपलब्ध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरिट सूची में प्राप्तांक नहीं हैं और RTI के जवाब में स्कोर शीट संधारित नहीं होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। शर्मा का कहना है कि किसी विद्यार्थी को प्रवेश देना ‘कृपा’ नहीं, बल्कि निर्धारित नियमों और योग्यता के आधार पर होने वाली प्रक्रिया है।
शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी शिकायत विश्वविद्यालय के लोकपाल के समक्ष रखने के लिए समय मांगा था, लेकिन उन्हें मुलाकात का अवसर नहीं मिल सका। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय में करीब चार महीने से लोकपाल का पद रिक्त है। उनका कहना है कि इस स्थिति में शिकायत निवारण की उपलब्ध व्यवस्था का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो सका।
हाई कोर्ट जाने की तैयारी
तनय शर्मा के अनुसार, उन्होंने प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित अपनी शिकायत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के समक्ष भी प्रस्तुत की है। अब विश्वविद्यालय स्तर पर समाधान नहीं होने की स्थिति में उन्होंने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ का रुख करने की बात कही है। शर्मा पिछले करीब तीन वर्षों से MCU में अध्ययनरत होने की बात कहते हैं। उनके अनुसार, इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए हैं।
उन्होंने आशंका जताई है कि उनके द्वारा उठाई गई शिकायतों और सवालों का प्रवेश प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ा हो सकता है। हालांकि, उन्होंने इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं बल्कि स्वतंत्र जांच का विषय बताया है।
स्वतंत्र जांच की मांग
तनय शर्मा ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को अंक किस आधार पर दिए गए, चयन की प्रक्रिया क्या रही और दस्तावेज सत्यापन के दौरान कथित माफीनामे की मांग किस आधार पर की गई। इन आरोपों और दावों पर विश्वविद्यालय का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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